Asara Mata Temple: मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में नदी किनारे बसा एक छोटा-सा मंदिर है, जिसकी मान्यता बेहद बड़ी है। टाकली मोरी गांव में स्थित 1000 साल पुराना आसरा माता मंदिर आज लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां की सबसे बड़ी मान्यता है कि जो भी निसंतान दंपति सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी गोद माता जरूर भरती हैं।
मंदिर की प्राचीन मान्यता और आस्था
दिखने में मंदिर भले ही छोटा लगे, लेकिन इसकी महिमा बहुत विशाल है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह दरबार करीब एक हजार साल पुराना है। सदियों से लोग अपनी हर परेशानी लेकर यहां आते हैं और माता रानी उनका आसरा बनती हैं।
निसंतान दंपतियों की मन्नत होती है पूरी
इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान निसंतान दंपतियों की मन्नत पूरी करना है। शादी के कई साल बाद भी जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिला, वे यहां आकर पूजा करती हैं। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से उनकी सूनी गोद खुशियों से भर जाती है। इसी वजह से सिर्फ खंडवा ही नहीं, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, देवास और ग्वालियर जैसे दूर-दूर के शहरों से भी महिलाएं यहां पहुंचती हैं। मन्नत पूरी होने के बाद लोग पूरे परिवार के साथ दोबारा माता को धन्यवाद देने आते हैं।
5 मंगलवार की पूजा का विशेष महत्व
मंदिर में पूजा की परंपरा भी बहुत अनोखी है। मंदिर के ठीक पास से एक छोटी नदी बहती है। दर्शन से पहले हर श्रद्धालु को इस नदी के पवित्र जल में स्नान करना जरूरी होता है। तभी मंदिर के अंदर प्रवेश मिलता है। गांव वालों का कहना है कि अगर कोई महिला लगातार 5 मंगलवार तक पूरी श्रद्धा से यहां पूजा करती है, तो माता उसकी हर इच्छा पूरी कर देती हैं।
माघ महीने में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
सालभर यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन माघ महीने में नजारा सबसे अलग होता है। खासकर माघ के पहले 15 दिनों में यहां तिल रखने की जगह नहीं मिलती। इस दौरान शादीशुदा बेटियां ससुराल और मायके वालों के साथ माता का आशीर्वाद लेने आती हैं। पूरे महीने भंडारे चलते हैं और भजन-कीर्तन से पूरा गांव भक्तिमय हो जाता है।
सदियों पुरानी आस्था आज भी कायम
सदियों से चले आ रहे इस चमत्कार का जवाब विज्ञान के पास भी नहीं है। डॉक्टरों से निराश होकर आए लोग भी यहां माथा टेकते हैं और उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। ग्रामीणों के लिए यह कोई शोध का विषय नहीं है। उनके लिए आसरा माता साक्षात कुलदेवी हैं, जिनका आशीर्वाद पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।आज भी दूर-दूर से लोग एक उम्मीद लेकर यहां आते हैं। छोटा-सा मंदिर, नदी का पवित्र जल और 5 मंगलवार की आस्था यही वे चीजें हैं जो इस 1000 साल पुराने दरबार को खास बनाती हैं।
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