Chadhava Chori Mamla: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की एसआईटी जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। राय के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका निर्णायक रही और कई मामलों में वही हुआ, जो उन्होंने चाहा।
निर्माण से जुड़े फैसलों पर उठाए सवाल
चंपत राय के दावे के मुताबिक, 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण निर्णय नृपेंद्र मिश्रा की पसंद के अनुसार लिए गए। उन्होंने दावा किया कि निर्माण के लिए किस कंपनी को काम दिया जाएगा और वास्तुकार कौन होगा, जैसे फैसलों में भी नृपेंद्र मिश्रा की अहम भूमिका रही। राय के अनुसार, कई मौकों पर नृपेंद्र मिश्रा के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की सलाह या फैसले को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि, ये चंपत राय के आरोप और दावे हैं, जिनकी अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Chadhava Chori Mamla: चढ़ावा मामले की जांच के बीच आया बयान
चंपत राय के ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं, जब राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसी मामले में नृपेंद्र मिश्रा ने पहले मीडियाकर्मी से बातचीत में उन्हें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि यह अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि ‘डाका’ तक बताया था। मिश्रा ने बिना किसी का नाम लिए यह भी आरोप लगाया था कि कुछ नियुक्तियां मनमाने तरीके से की गईं। बातचीत में मिश्रा ने पहली बार कहा था कि राम मंदिर का संचालन और उसकी व्यवस्था सीईओ सरीखे सिस्टम के दायरे में आना चाहिए.
Chadhava Chori Mamla: मंदिर निर्माण 2027 तक पूरा होने का दावा
नृपेंद्र मिश्रा पहले राम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने की समयसीमा मार्च 2027 बता चुके हैं। ऐसे में चंपत राय के ताजा दावों से मंदिर निर्माण और प्रबंधन से जुड़े पुराने फैसलों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस फिर तेज हो सकती है।
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