Chandigarh: पंजाब में कांग्रेस टूट के कगार पर दिखाई दे रही है। अब यह पार्टी के लिए मंथन का विषय है कि अतीत में लिये गये निर्णय उसके लिए भारी पड़ रहे हैं या फिर वर्तमान में बनाए हालात, लेकिन सच यही है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी बहुत बड़ी मुसीबत में फंस चुकी है। राज्य में असंतुष्ट नेताओं की नाराजी, खासकर सासंद चरणजीत सिंह चन्नी के बगावती तेवर कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
कांग्रेस आलाकमान का कौन सा फैसला सही?
कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि सितंबर 2021 में राज्य की अंदरूनी कलह को दूर करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर जिन चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी की गई थी, वही आज आलाकमान के लिए बड़ा संकट बन गए हैं। चन्नी के बगावती तेवर आलाकमान को चुनौती दे रहे हैं। चन्नी इस बात को लेकर बेहद खफा हैं कि पार्टी आलाकमान ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया, बल्कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा।
हालांकि पार्टी ने चन्नी को चुनाव अभियान की कमान सौंपी है, लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हैं। इस बीच उन्होंने अपने आवास पर विधायकों और करीब 50 पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर आलाकमान को अपने इरादे जता दिये हैं।ऐसे में क्या कांग्रेस आलाकमान को सोचना पड़ेगा कि 2021 में उसने चन्नी को सीएम बनाकर सही फैसला लिया था कि अब इलेक्शन कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाने का फैसला उचित है? दोनों ही फैसले आलाकमान के हैं।
Chandigarh: चन्नी अकेले नहीं
राज्य में एक अकेले चन्नी नहीं, बल्कि और भी नेता असंतुष्ट चल रहे हैं। राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा के बारे में तो यहां तक कहा जा रहा है कि वे नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं।इतना ही नहीं पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी कह चुके हैं कि भाजपा में सबका स्वागत है। जाहिर है कि राज्य में चुनाव से पहले कांग्रेस खतरे में है।आलाकमान से खफा नेता उसे सबक सिखाने मूड में दिखाई देते हैं। रंधावा भी अध्यक्ष पद के दावेदार थे। कुछ दिन पहले सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी भी खुलेआम सामने आ चुकी है।
Chandigarh: क्या कोई खेल चल रहा है?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पंजाब में आज जो सियासी हालात बन चुके हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि राज्य में कोई बड़ा खेल हो सकता है। कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का भाजपा से संपर्क साधने का मतलब है कि कहीं न कहीं कोई खिचड़ी अवश्य पक रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ढिल्लों की इस बात के गहरे मायने हैं कि भाजपा में सबका स्वागत है। यदि कांग्रेस के असंतुष्ट भाजपा में आते हैं, तो भाजपा को उन्हें लेने में कोई दिक्कत भी नहीं है। वह भी चाहेगी कि चुनाव से पहले दिग्गज नेता उससे जुड़ें।








