मां बोलीं- हालात से परेशान था बेटा
कुंती देवी के मुताबिक, प्रबल घर की परिस्थितियों को लेकर काफी चिंतित रहता था। वह पढ़ाई और करियर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन आर्थिक समस्याएं लगातार उसके सामने चुनौती बनी हुई थीं। परिवार का कहना है कि इन्हीं परेशानियों के बीच वह कानूनी लड़ाई भी लड़ रहा था, जिससे उसका तनाव बढ़ता गया।परिवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट जाने से कुछ दिन पहले प्रबल अपनी मां से मिलने आगरा आया था। उस दौरान उसने घरवालों से कहा था कि वह “अंतिम लड़ाई लड़ने दिल्ली जा रहा है और वहां उसे न्याय मिलेगा।” हालांकि, किसी को अंदाजा नहीं था कि दिल्ली पहुंचकर वह इस तरह की घटना को अंजाम देगा।
CJI Abuse Case: ताऊ ने बताया- शांत स्वभाव का था प्रबल
प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह का कहना है कि परिवार को सुप्रीम कोर्ट की घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के जरिए मिली। उन्होंने दावा किया कि प्रबल बचपन से पढ़ाई में अच्छा था और उसका स्वभाव शांत था। उन्होंने कहा कि उसने कभी किसी से ऊंची आवाज में बात तक नहीं की।परिवार का मानना है कि लगातार चल रही कानूनी लड़ाई, आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता ने उसे मानसिक रूप से परेशान कर दिया था। ताऊ के अनुसार, जिस कंपनी में प्रबल काम करता था, वहां उसका कुछ पैसा भी फंसा हुआ था और इसी विवाद को लेकर वह अदालतों के चक्कर लगा रहा था।
CJI Abuse Case: पिता ने भी आर्थिक संकट को बताया वजह
प्रबल के पिता सुरेंद्र सिंह यादव, जो किसान हैं, ने बताया कि बेटा कई परेशानियों से गुजर रहा था। उन्होंने दावा किया कि प्रबल साइबर फ्रॉड का भी शिकार हुआ था और शिकायत के बावजूद उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसी मामले को लेकर उसने कानूनी रास्ता अपनाया था।परिवार के मुताबिक, लगातार सुनवाई न होने और आर्थिक दबाव के कारण प्रबल काफी तनाव में रहने लगा था। पिता का कहना है कि बेटे को न्याय मिलने की उम्मीद थी और इसी उम्मीद में वह अदालतों का रुख कर रहा था।
बीएड के बाद नहीं मिली नौकरी, फिर कानून की पढ़ाई शुरू की
परिवार के अनुसार, प्रबल ने बीएड की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। इसके बाद वह लखनऊ चला गया और लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई शुरू की। वहां रहने के दौरान वह ट्यूशन पढ़ाकर और एक निजी कंपनी में काम करके अपना खर्च चलाता था।परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसकी पढ़ाई में उसके मामा भी मदद करते थे। परिजनों का कहना है कि प्रबल अपने भविष्य को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा था।
CJI Abuse Case: कंपनी विवाद के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई
इस मामले में एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। जांच के मुताबिक, प्रबल लखनऊ की एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में काम करता था। आरोप है कि उसने एक महिला सहकर्मी को आपत्तिजनक ईमेल भेजे और अभद्र टिप्पणियां कीं। शिकायत के बाद कंपनी ने पहले उसे चेतावनी दी, लेकिन कथित तौर पर व्यवहार में सुधार नहीं होने पर उसे नौकरी से हटा दिया गया।इसके बाद प्रबल ने कंपनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। पुलिस और निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया और आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट में हुआ था हंगामा
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप यादव ने कथित तौर पर न्यायाधीशों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने अदालत की कार्यवाही के दौरान फाइल के पन्ने हवा में उछाल दिए और भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए भी अनुचित शब्दों का प्रयोग किया।घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्ट रूम से बाहर कर दिया। बाद में अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उसकी मानसिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया।फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर चर्चा जारी है। जहां एक ओर अदालत में उसके व्यवहार की आलोचना हो रही है, वहीं परिवार का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही परेशानियों और दबाव ने उसकी स्थिति को प्रभावित किया।








