CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता ने दावा किया है कि सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया है। उनका कहना है कि पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात हो सकती है। पिछले कई दिनों से जारी प्रदर्शन के बाद आज CJP के समर्थक संसद की ओर मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और आरएएफ के बीच झड़प भी देखने को मिली।
एक्स पर दी जानकारी
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सरकार ने सुबह बातचीत के लिए संपर्क किया था। उन्होंने लिखा कि सुबह 11:52 बजे वे और आशुतोष रांका, कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह स्पष्ट हैं और बड़ी संख्या में युवा इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। अब यह देखना होगा कि अगर सरकार और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत होती है, तो उनकी किन मांगों पर सहमति बनती है।
#IMPORTANT: It’s 11:52 AM. Ashutosh Ranka and I, on behalf of the Cockroach Janta Party, are on our way to meet J.P. Nadda. The government had reached out for talks in the morning. Our demands are clear. The youth has gathered in huge numbers.
We shall win!
— Saurav Das (@SauravDassss) July 20, 2026
संसद मार्च के दौरान झड़प
कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे CJP समर्थकों ने आज संसद की ओर मार्च निकाला। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही आरएएफ और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। हालांकि प्रदर्शन जारी रहा और सभी की नजरें सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं।दूसरी ओर, CJP के नेता अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उनका अनशन सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने तुड़वाया। इससे पहले सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं, जिनकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र के जरिए दी थी।
वांगचुक की तीन शर्तें
अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों और पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी, सोनम वांगचुक और CJP के नेतृत्व को संसद तक पहुंचने की अनुमति दी जाए। तीसरी, विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा दें कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। यदि स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो अस्पताल पहुंचकर पत्र में बताई गई बातों पर अपना समर्थन और भरोसा जताएं।
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