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श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे ही क्यों मनाया जाता है? जानें शास्त्रों में क्या है मान्यता

Janmashtami

Janmashtami: देशभर में आज, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव रात 12 बजे मनाने की परंपरा है। इस दौरान शंख-घंटियों की गूंज और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे ही क्यों माना जाता है? क्या धर्मग्रंथों में सचमुच 12:00 AM का उल्लेख मिलता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। हिंदू पंचांग में मध्यरात्रि के इस विशेष समय को ‘निशिता काल’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष महत्व वाला समय माना गया है। अष्टमी तिथि को भी एक संधि तिथि माना जाता है। इसी कारण कृष्ण जन्म के लिए इस तिथि, नक्षत्र और मध्यरात्रि के संयोग को विशेष माना जाता है।

Janmashtami: अंधकार में हुआ प्रकाश का अवतरण

कृष्ण जन्म की कथा में मध्यरात्रि का समय प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जब मथुरा में कंस के अत्याचार और अधर्म का अंधकार चरम पर था, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। इसे अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय के संदेश से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार उनके जन्म के समय यमुना उफान पर थीं और कारागार के पहरेदार निद्रा में थे। इसी दौरान कारागार के दरवाजे खुल गए और भगवान दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए।

ब्रज में ‘माखन चोर’ की अलग मान्यता

ब्रज के रसिक भक्त कृष्ण को केवल भगवान ही नहीं, बल्कि सखा और मित्र के रूप में भी देखते हैं। उनके अनुसार कृष्ण का मध्यरात्रि में जन्म लेना उनकी ‘चोरी’ वाली लीलाओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जैसे चोर रात में आते हैं, वैसे ही कान्हा भी कंस से नजर बचाकर रात में आए और आगे खुलकर ‘माखन चोर’ कहलाए। इसी भाव से जुड़ा प्रसिद्ध श्लोक है— “व्रजे प्रसिद्धं नवनीतचौरं…”

Janmashtami: क्या ठीक 12:00 बजे हुआ था जन्म

यह समझना जरूरी है कि प्राचीन धर्मग्रंथों में आज की तरह घड़ी के अनुसार ‘12:00 AM’ लिखकर समय निर्धारित नहीं किया गया था। कृष्ण जन्म का वर्णन ‘मध्यरात्रि’ और ‘निशिता काल’ जैसे समय-खंडों के आधार पर मिलता है। बाद के समय में इसी मध्यरात्रि को आम बोलचाल में रात 12 बजे के रूप में समझा जाने लगा। इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव मनाने की परंपरा आज भी कायम है।

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