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खतरनाक मोड़ पर पहुंच रहा अल नीनो, 2027 तक सूखा-बाढ़ और भीषण गर्मी का संकट

 El Nino Weather Impact:

El Nino Weather Impact: दुनिया के मौसम का मिजाज एक बार फिर बड़े खतरे की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनो को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके असर से दुनिया के कई हिस्सों में 2027 तक भीषण गर्मी, सूखा और विनाशकारी बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

El Nino Weather Impact: अल नीनो को लेकर UN की गंभीर चेतावनी-

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अल नीनो तेजी से गंभीर रूप ले रहा है। बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच दुनिया पहले ही चरम मौसम के खतरे वाले दौर में प्रवेश कर चुकी है। वहीं, WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो के मुताबिक, मौसम में होने वाला यह बड़ा बदलाव दुनियाभर के जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।

El Nino Weather Impact: प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रहा तापमान-

अल नीनो का प्रमुख क्षेत्र माने जाने वाले मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है।मई से जुलाई के बीच नीनो 3.4 सूचकांक सामान्य से करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। जुलाई में यह अंतर बढ़कर 2 डिग्री और अगस्त के मध्य तक करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। समुद्र की सतह के नीचे भी तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है, जिससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

फरवरी 2027 तक रह सकता है अल नीनो-

WMO के वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना बेहद अधिक है। इसके 2026 के अंत तक अपने सबसे उग्र स्तर पर पहुंचने का अनुमान जताया गया है। अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो आमतौर पर हर 2 से 7 साल में दिखाई देती है। हालांकि, बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण इसके प्रभाव और गंभीर होने की आशंका है।

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ेगा गर्मी और सूखे का खतरा-

सितंबर से नवंबर 2026 के दौरान दुनिया के अधिकांश जमीनी इलाकों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। इससे वर्षा चक्र प्रभावित हो सकता है और कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं, कुछ इलाकों में इसके उलट अत्यधिक बारिश और विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

IOD भी बढ़ा सकता है मौसम का संकट-

इसी अवधि में हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के सकारात्मक चरण में जाने की भी प्रबल संभावना जताई गई है। इसका असर क्षेत्रीय मानसूनी हवाओं और समुद्री पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है। अल नीनो और IOD में बदलाव के कारण कृषि उत्पादन, जल सुरक्षा और आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

तैयारी के लिए यही सही समय-

WMO के मुताबिक, इस संभावित मौसमी संकट से निपटने के लिए सरकारों और मानवीय एजेंसियों को अभी से तैयारियां तेज करनी चाहिए। समय रहते चेतावनी व्यवस्था, जल प्रबंधन, कृषि योजना और आपदा तैयारियों को मजबूत करके जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है

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