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दतिया उपचुनाव 2026 का ऐलान: जानिए कब होगा मतदान, क्यों खाली हुई सीट और किसके बीच होगा बड़ा मुकाबला?

दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026: पूरी जानकारी

Datia Bypoll Election: चुनाव आयोग ने दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही पूरा चुनाव कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है। उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 जुलाई तय की गई है। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी।

निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद दतिया विधानसभा क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। सभी मतदान केंद्रों पर वोटिंग ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के जरिए कराई जाएगी।

क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव?

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया।यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के तहत की गई।

28 साल पुराने बैंक एफडी मामले में हुई कार्रवाई

साल 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। आरोप था कि बैंक के रिकॉर्ड में बदलाव कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई।इसके आधार पर वर्ष 1999 से 2011 के बीच लगातार ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेन्द्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। बाद में मामले की जांच हुई और उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया।

कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा

1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में राजेन्द्र भारती को दोषी करार दिया। दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।इसके अगले दिन यानी 2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत दी गई, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही।इसी दिन मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 से उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी। साथ ही दतिया विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को भेज दी गई।

सदस्यता तुरंत क्यों खत्म हुई?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो वह तत्काल अयोग्य हो जाता है। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद ऐसे मामलों में सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है।सिर्फ अपील दाखिल करने से सदस्यता वापस नहीं मिलती। इसके लिए उच्च अदालत को दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगानी होती है।

Datia Bypoll Election:  दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026, पूरी जानकारी
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026: पूरी जानकारी

2023 चुनाव में नरोत्तम मिश्रा क्यों हारे?

2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा की हार की सबसे बड़ी वजह बसई का शहरी क्षेत्र माना गया। 13 राउंड की मतगणना में उन्हें केवल 3 राउंड में बढ़त मिली, जबकि 10वें राउंड तक कांग्रेस के राजेन्द्र भारती लगभग 8 हजार वोटों से आगे चल रहे थे।बीजेपी को उम्मीद थी कि 2018 की तरह बसई से इस बार भी बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11वें और 12वें राउंड में भी नरोत्तम मिश्रा क्रमशः 866 और 379 वोटों से पीछे रहे। आखिरी राउंड में 735 वोटों की बढ़त मिलने के बावजूद वे 7,742 वोटों से चुनाव हार गए।

हार की वजह क्या मानी गई?

एडवोकेट इतरत अली जैदी के अनुसार विकास कार्य जरूर हुए, लेकिन नरोत्तम मिश्रा के करीबी लोगों की कार्यशैली से जनता नाराज थी। उन्होंने 2022 के नगर पालिका चुनाव में कथित धांधली और स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी को भी हार की प्रमुख वजह बताया। उन्होंने ‘लाला का तालाब’ की टूटी दीवार का उदाहरण दिया, जो आज भी लोगों की नाराजगी का कारण है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिश्रा को पार्टी के अंदर से भी नुकसान हुआ। परसराम श्रीवास्तव और राजू त्यागी के अनुसार कार्यकर्ता चुनाव के दौरान पूरी तरह सक्रिय नहीं रहे और अति आत्मविश्वास में थे। बीजेपी कार्यालय प्रभारी रोहित दुबे ने भी माना कि कार्यकर्ता जीत को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त थे।

राजेन्द्र भारती के ढाई साल के कार्यकाल पर क्या राय?

राजेन्द्र भारती के करीब ढाई साल के कार्यकाल को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है। परसराम श्रीवास्तव का कहना है कि वे जनता से दूर रहे। वहीं इतरत अली जैदी का कहना है कि भारती अक्सर प्रशासन और पुलिस पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव की बात करते थे।राजू त्यागी और शलस त्रिपाठी का आरोप है कि विधायक निधि का उपयोग विधानसभा क्षेत्र के बाहर किया गया और विधानसभा में सवाल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए उठाए गए।

हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेन्द्र दांगी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असहयोग के बावजूद राजेन्द्र भारती ने विधायक निधि से जितने संभव थे, उतने विकास कार्य कराए।

उपचुनाव में कौन-कौन हैं प्रमुख दावेदार?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर कई दावेदार सामने आए हैं। अयोग्य घोषित किए गए राजेन्द्र भारती अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।वहीं विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

बीजेपी की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है।आजाद समाज पार्टी (एएसपी) की ओर से दामोदर यादव उम्मीदवार होंगे। उनका कहना है कि पार्टी उन्हें दतिया से उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।

तीनों दलों की चुनावी रणनीति

1. बीजेपी: डैमेज कंट्रोल पर फोकस

राजेन्द्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार सक्रिय हैं। वे सामाजिक सम्मेलनों और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए नाराज कार्यकर्ताओं और अलग-अलग समाजों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो महीनों में वे एक दर्जन से ज्यादा कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।सूत्रों के मुताबिक, वे दतिया के लिए बड़ी सरकारी घोषणा की तैयारी में हैं और 1 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात कर चुके हैं। बीजेपी का कहना है कि इस बार संगठन पिछली गलतियों से सीख लेकर चुनाव लड़ेगा।

2. कांग्रेस: टिकट पर खींचतान

कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। राजेन्द्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट चाहते हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद टिकट नहीं मिलने पर उनके बागी होने की चर्चाएं भी चल रही हैं।पिछले चुनाव में टिकट छोड़ने वाले अवधेश नायक खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। वहीं पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी टिकट की दौड़ में सक्रिय हैं।हालांकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक दांगी का कहना है कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और उम्मीदवार का चयन सर्वे के आधार पर किया जाएगा।

3. आजाद समाज पार्टी: मुकाबला बना सकती है रोचक

दामोदर यादव किसान सम्मेलनों और बैठकों के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनकी मजबूत मौजूदगी रहती है तो इसका सबसे ज्यादा असर कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ सकता है।

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