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दिग्विजय सिंह ने उज्जैन जमीन मामले में मोहन सरकार को दी ‘क्लीनचिट’, कहा- ट्रस्ट को संपत्ति देने में कोई घोटाला नहीं

Digvijaya Singh:

Digvijaya Singh: वीर भारत न्यास को सरकारी जमीन आवंटन के मुद्दे पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर बड़ा अंतर्विरोध सामने आ गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वीर भारत न्यास को जमीन का आवंटन नियमानुसार हुआ है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है।

दिग्विजय बोले- नियमानुसार हुआ जमीन आवंटन

उज्जैन में मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह बिना शोध और तथ्यों के कोई बयान नहीं देते। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना पहले से चली आ रही प्रक्रिया है। उनके मुताबिक वीर भारत न्यास कोई निजी संस्था नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट है।

Digvijaya Singh: कमलनाथ का भी दिया उदाहरण

दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी वीर भारत न्यास के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहले इस संपत्ति को निजी होटल समूह को देने की चर्चा भी हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

Digvijaya Singh: जीतू पटवारी ने लगाया था 500 करोड़ के घोटाले का आरोप

दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी के वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन और भवन मात्र एक रुपये की लीज पर दे दिए गए हैं। उन्होंने इसे बड़ा घोटाला बताया था।

‘दलाल माहौल बनाने का काम करते हैं’

दिग्विजय सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में कई बार दलाल छोटे-छोटे आरोप लगाकर माहौल बनाते हैं और वसूली का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि तथ्यों की जांच किए बिना किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना उचित नहीं है।

कांग्रेस की रणनीति पर उठे सवाल

दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि सरकार को घेरने के मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच एकराय नहीं है। दिग्विजय के बयान से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों की धार कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

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