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ई 20 पेट्रोल से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, किसानों की आय बढ़ाने में भी मिली सफलता

E20 FUEL: ई 20 पेट्रोल से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत - सरकार

E20 FUEL: केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया है। सरकार की ओर से जारी एक तथ्य पत्र के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण से न केवल कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, बल्कि विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, किसानों की आय में वृद्धि और कार्बन उत्सर्जन घटाने में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों को बड़ा लाभ

तथ्य पत्र के अनुसार, वर्ष 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत लगभग 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल का विकल्प तैयार किया गया। इससे देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। वहीं, गन्ना, मक्का और चावल से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने के कारण किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

E20 FUEL: कार्बन उत्सर्जन में आई बड़ी कमी

सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण से अब तक 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल आयात पर निर्भरता कम करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बना रहा है।

दुनिया के कई देशों में अपनाया गया मॉडल

तथ्य पत्र में कहा गया है कि एथेनॉल मिश्रण केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भी इसे अपना चुकी हैं। अमेरिका में E10 मानक ईंधन है और E15 का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ब्राजील में E27 मिश्रण अनिवार्य है, जिसे आगे बढ़ाकर लगभग 35 प्रतिशत करने की तैयारी है। वहीं जापान भी चरणबद्ध तरीके से E10 ईंधन को बढ़ावा दे रहा है।

E20 FUEL: स्वच्छ ईंधन की दिशा में मजबूत कदम

सरकार का कहना है कि कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी स्वच्छ ईंधन नीति के तहत एथेनॉल मिश्रण को अपनाया है। भारत में इस कार्यक्रम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिली है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन भविष्य की टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

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