Fake Birth Certificate Bill: सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन का विधेयक लोकसभा में पेश किया है। गृह मंत्रालय की ओर से लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने पर रोक लगाना और समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना है।
Fake Birth Certificate Bill: दो साल बाद प्रमाण पत्र के लिए न्यायिक मंजूरी होगी जरूरी-
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु के दो साल से अधिक समय बाद प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जाता है, तो प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य होगी। साथ ही आवेदन की सत्यता की विस्तृत जांच भी की जाएगी।
Fake Birth Certificate Bill: एक से दो साल की देरी पर डीएम या एसडीएम की अनुमति जरूरी-
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से दो साल के बीच कराया जाता है, तो इसके लिए डीएम, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी को आवेदन की पूरी जांच करनी होगी।
फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी लगाम-
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
पश्चिम बंगाल में बने थे बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र-
सरकार के अनुसार, एसआईआर के दौरान कई राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल, में बड़ी संख्या में जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए थे। इनमें अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने की आशंका जताई गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने का फैसला किया है।
तीन साल पहले भी हुआ था कानून में संशोधन-
इससे पहले करीब तीन साल पहले भी इस अधिनियम में संशोधन किया गया था। इसके तहत सभी राज्यों के लिए जन्म और मृत्यु का डिजिटल रिकॉर्ड रखना और हर महीने उसका डेटा भारत के महापंजीयक को भेजना अनिवार्य किया गया था। वर्तमान में देरी से आवेदन की स्थिति में एसडीएम के आदेश पर स्थानीय निकाय जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करते हैं।
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