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राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी वाले बयान पर सुधांशु का पलटवार, गिनाए राज्यों के उदाहरण

Gyanesh Kumar: Sudhanshu hits back at Rahul's statement on anti-incumbency

Gyanesh Kumar: राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर को लेकर दिए बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है। राहुल गांधी ने चुनावी राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी के प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले अलग-अलग राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान देखने को मिलता था, लेकिन अब यह बीजेपी के खिलाफ उसी तरह क्यों नहीं दिख रहा। उनके बयान के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए कई राज्यों के उदाहरण गिनाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के तर्क को समझने के लिए कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों में लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने के रिकॉर्ड को भी देखना चाहिए।

बिहार में 1990 के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर

सुधांशु त्रिवेदी ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि 1990 के बाद से राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लंबे समय तक अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें सत्ता में आती-जाती रही हैं। बीजेपी ने राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी वाले तर्क के जवाब में इसी तरह के राजनीतिक बदलावों का उल्लेख किया।

Gyanesh Kumar: ओडिशा और बंगाल का भी किया जिक्र

बीजेपी नेता ने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि 1999 के बाद कांग्रेस राज्य की सत्ता में नहीं आई। उनके मुताबिक, इसके बाद बीजू जनता दल लंबे समय तक सत्ता में रहा। पश्चिम बंगाल को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी की लगातार तीन सरकारों का उल्लेख किया। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सत्ता परिवर्तन का पैटर्न एक जैसा नहीं रहा है।

यूपी में कांग्रेस की वापसी पर उठाया सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने उत्तर प्रदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1989 के बाद कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापस नहीं आ सकी। उन्होंने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी की। बीजेपी नेता ने दावा किया कि कांग्रेस को कई जगह चुनावी सफलता के लिए सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ती है।

Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी पलटवार

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इसके जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर उठ रहे सवालों पर प्रश्न किया। उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित रिपोर्ट में किसी चुनाव आयुक्त का प्रत्यक्ष बयान है और क्या उसमें यह कहा गया है कि फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ। इस तरह एंटी-इनकंबेंसी के मुद्दे के साथ चुनाव आयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

 

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