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तंबूरे से बॉलीवुड तक सुनील की आवाज: सागर के गांव से ‘हनुमान अंश’ तक कैसे पहुंचा सफर? 4 सवालों में पूरी कहानी

Hanuman Ansh film: सागर के छोटे से गांव अगरा की चौपाल में हाथ में तंबूरा लेकर भजन गाने वाला एक युवक… कभी गांव की भजन मंडलियों में अपनी आवाज सुनाने वाला सुनील लोधी आज मुंबई के स्टूडियो तक पहुंच चुका है। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनकी आवाज में रिकॉर्ड किया गया बुंदेली भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डारि दई’ सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

25 साल के सुनील की कहानी किसी बड़े म्यूजिक प्लेटफॉर्म या फिल्मी परिवार से शुरू नहीं हुई। जन्म से आंखों की रोशनी नहीं थी, पढ़ाई भी ज्यादा नहीं हो सकी और परिवार की आर्थिक स्थिति भी साधारण रही। इसके बावजूद भजन और लोक संगीत उनका सहारा बने।

फिर एक मोबाइल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर पहुंची, आवाज वायरल हुई और इसी पहचान ने उन्हें मुंबई तक पहुंचा दिया। आखिर सुनील कौन हैं, उनकी आवाज गांव से बाहर कैसे निकली, बॉलीवुड की नजर उन पर कैसे पड़ी और फिल्म में गाना मिलने के बाद जिंदगी में क्या बदला? 4 सवालों में समझिए ‘बुंदेलखंड टू बॉलीवुड’ का पूरा सफर।

सवाल 1: सागर के सुनील लोधी कौन हैं? वायरल होने से पहले जिंदगी कैसी थी?

सुनील सागर जिले के गांव अगरा के रहने वाले हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। पिता के पास करीब एक-दो एकड़ जमीन है, जहां खेती के साथ मजदूरी और पशुपालन से परिवार की आय होती है। चार भाई-बहनों में से एक सुनील की दो बहनों की शादी हो चुकी है। सुनील की जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती बचपन से ही रही। आंखों की नस में जन्मजात समस्या के कारण उन्हें दिखाई नहीं देता। परिवार ने इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने रोशनी लौटने की उम्मीद नहीं बताई। औपचारिक शिक्षा भी ज्यादा नहीं हो सकी। वे छोटे भाई के साथ स्कूल जाते थे। वहां एक शिक्षक ने उन्हें अक्षर ज्ञान और गिनती जैसी बुनियादी चीजें सिखाईं। यही शिक्षक बाद में उनके शुरुआती संगीत गुरु भी बने।

सुनील को बचपन से ही गाने का शौक था। गांव में होने वाली भजन बैठकों में जाकर उन्होंने बड़े-बुजुर्गों से भजन सीखे और तंबूरा बजाना भी सीखा। शुरुआत में गुरुजी और गांव के कुछ लोग मोबाइल पर उनकी आवाज रिकॉर्ड करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कई बार गुजारे के लिए उन्हें ट्रेनों में भी भजन गाकर पैसे जुटाने पड़े। यानी बॉलीवुड तक पहुंचने से पहले सुनील की दुनिया गांव की चौपाल, तंबूरा और भजनों तक सीमित थी।

Hanuman Ansh film: सवाल 2: सुनील की आवाज गांव से बाहर कैसे निकली?

सुनील की आवाज को गांव की सीमाओं से बाहर पहुंचाने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही। ‘बुंदेली दुनिया’ नाम से सोशल मीडिया पेज चलाने वाले रोहित साहू से सुनील का संपर्क उनकी चाची के जरिए हुआ। रोहित ने सुनील की आवाज में मौजूद बुंदेली लोक संगीत की खासियत पहचानी।उन्होंने मोबाइल से सुनील के भजन रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू किया। इसके बाद सागर के गायक अंकित पांडे के साथ भी सुनील ने एक गीत रिकॉर्ड किया। ‘दूल्हा बनके आ गए जीजा, जिज्जी को ब्याव माने रैया ने भौंरा’ को करीब 18 लाख बार देखा गया। हालांकि, सुनील को इससे उतनी बड़ी पहचान नहीं मिली, जितनी बाद में उनके हनुमान भजनों से मिली।

रोहित और सुनील का रिश्ता सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। सुनील उन्हें ‘मामा’ कहकर बुलाते हैं। मुश्किल दौर में जब सुनील मानसिक रूप से परेशान और निराश थे, तब रोहित ने उनका साथ दिया। इसके बाद 2020 में सुनील का एक और वीडियो वायरल हुआ। फिर ‘मोरे संकट के कटैया’ जैसे हनुमान भजन सोशल मीडिया पर लोगों तक पहुंचे। यहीं से सुनील की आवाज ने गांव की चौपाल से निकलकर व्यापक पहचान बनानी शुरू की।

Hanuman Ansh film
                                                                                     Hanuman Ansh film
सवाल 3: सुनील को ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका कैसे मिला?

सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ने के बाद सुनील और रोहित बेहतर अवसरों की तलाश में मुंबई पहुंचे। मुंबई में म्यूजिक प्रोड्यूसर पंकज VRK ने सुनील से आठ गाने रिकॉर्ड कराए। इसी दौरान ओम साईं राम स्टूडियो की ओर से भी उन्हें भजन गाने के लिए बुलाया गया। एक कार्यक्रम के बाद सुनील और रोहित वर्सोवा बीच पहुंचे। दोनों वहां मोबाइल से लाइव वीडियो और रील बना रहे थे। इसी दौरान फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी का फोन आया। निर्देशक ने सुनील की वर्सोवा बीच से पोस्ट की गई रील पहले ही देख ली थी। इसके बाद उन्हें स्टूडियो बुलाया गया। सुनील को फिल्म में बुंदेली भजन गाने का मौका मिला।

उन्होंने हामी भरी और उसी रात स्टूडियो में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डारि दई’ रिकॉर्ड किया गया। यानी जिस आवाज की शुरुआत गांव की चौपाल में तंबूरे से हुई थी, वही आवाज पहली बार मुंबई के रिकॉर्डिंग स्टूडियो में फिल्म के लिए रिकॉर्ड हुई। रोहित के मुताबिक, सुनील को आने वाले समय में कुछ अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए भी संपर्क किया जा रहा है।  हालांकि, फिल्म की सफलता में सुनील के भजन का कितना योगदान रहा, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इतना जरूर है कि भजन के वायरल होने से फिल्म को सोशल मीडिया पर अतिरिक्त चर्चा मिली।

Hanuman Ansh film: सवाल 4: फिल्म में गाना मिलने के बाद सुनील की जिंदगी में क्या बदला?

फिल्म में गाना मिलने के बाद सुनील के करियर में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। उन्हें फिल्म के लिए फीस मिली है और भविष्य में दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए भी संपर्क किए जाने की बात सामने आई है। लेकिन फिल्म तक पहुंचने के बाद भी संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। सुनील बताते हैं कि एक रिकॉर्डिंग के सिलसिले में वे झांसी गए थे। रात करीब 12 बजे ऑटो चालक ने उन्हें रास्ते में उतार दिया। उस समय उनकी जेब में सिर्फ 150-200 रुपये थे। यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने और फिल्म में आवाज देने के बावजूद उनकी रोजमर्रा की आर्थिक मुश्किलें लंबे समय तक बनी रहीं। अब उनका सपना बॉलीवुड के मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के साथ गाना गाने का है।

इसी बीच सुनील को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी मदद का भरोसा मिला है। गुरुवार को परिवार के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान उन्हें एक लाख रुपये की सम्मान निधि देने का आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी आंखों के इलाज के लिए जरूरी मदद और संगीत विद्यालय के जरिए औपचारिक शिक्षा दिलाने में सहयोग का भरोसा भी दिया। इसी दौरान मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की ओर से सुनील को उनकी पसंद की नई पल्सर बाइक उपहार में दी गई।

Hanuman Ansh film
                                             Hanuman Ansh film

फिल्म रिलीज होने के बाद सुनील पहली बार अपने परिवार के साथ सागर के सिनेमाहॉल पहुंचे और बड़े पर्दे पर ‘हनुमान अंश’ देखी। जिस आवाज को अब तक मोबाइल स्क्रीन और गांव की चौपालों में सुना था, उसे बड़े पर्दे पर सुनना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।

Hanuman Ansh film: कहानी सिर्फ बॉलीवुड पहुंचने की नहीं

सुनील लोधी की कहानी को सिर्फ ‘एक वायरल सिंगर के बॉलीवुड पहुंचने’ की कहानी कहना अधूरा होगा। यह कहानी उस आवाज की है, जिसकी शुरुआत सागर के एक छोटे से गांव से हुई, जिसने तंबूरे के सहारे अपनी पहचान बनाई, सोशल मीडिया ने जिसे दुनिया तक पहुंचाया और एक रील ने मुंबई के स्टूडियो का रास्ता खोल दिया। आंखों की रोशनी नहीं थी, लेकिन संगीत को लेकर उनका भरोसा बना रहा। आर्थिक मुश्किलें थीं, लेकिन गाना नहीं छूटा। चौपाल से सोशल मीडिया, सोशल मीडिया से मुंबई और मुंबई से सिनेमा तक सुनील का ‘बुंदेलखंड टू बॉलीवुड’ सफर अभी शुरू हुआ है।

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