HEALTH NEWS: बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच कलर थेरेपी (Color Therapy) एक पूरक उपचार पद्धति के रूप में लोकप्रिय हो रही है। इसमें अलग-अलग रंगों की रोशनी का उपयोग शरीर और मन को संतुलित करने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह चिकित्सा का विकल्प नहीं बल्कि उपचार के साथ सहायक तकनीक है।
हरा रंग: तनाव कम, शरीर को ऊर्जा
कलर थेरेपी में हरे रंग को हीलिंग का प्रतीक माना जाता है। 5 से 10 मिनट तक हरी रोशनी देने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
HEALTH NEWS: पीला और नारंगी रंग: दिमाग और शरीर को सक्रिय
पीली रोशनी मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को सक्रिय करने में मदद करती है। यह एकाग्रता बढ़ाने और श्वसन संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है। वहीं नारंगी रंग लीवर, किडनी और रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। हालांकि उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) वाले लोगों को नारंगी रोशनी देने से बचने की सलाह दी जाती है।
लाल रंग: दर्द से राहत
लाल रंग की रोशनी का उपयोग जोड़ों और घुटनों के दर्द में किया जाता है। विशेषज्ञ इसे अधिकतम पांच मिनट तक ही देने की सलाह देते हैं। सिर और किडनी वाले हिस्से पर लाल रोशनी का प्रयोग नहीं किया जाता।
HEALTH NEWS: नीला और वायलेट: मानसिक शांति के लिए
नीली और वायलेट रोशनी को सबसे शांत प्रभाव वाला माना जाता है। इनका उपयोग उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मानसिक शांति के लिए 10 से 15 मिनट तक किया जाता है।
सावधानी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि कलर थेरेपी हमेशा प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में ही करानी चाहिए। इंफ्रारेड लाइट का उपयोग पेट और जननांगों पर नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही यह थेरेपी किसी भी बीमारी के मेडिकल उपचार का विकल्प नहीं है, बल्कि केवल सहायक पद्धति है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही रंग का सही समय पर उपयोग मूड, नींद और ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।
REPORT BY- MANSI SHARMA
ये भी पढ़े… 8वें वेतन आयोग का इंतजार कब होगा खत्म? पिछले ट्रेंड्स क्या बताते हैं, जानिए








