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India ने ईरान को भेजी मेडिकल सहायता की पहली खेप, दूतावास ने जताया आभार

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच India ने ईरान के लिए मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से मेडिकल सहायता की पहली खेप ईरान भेजी गई है, जिसमें जरूरी दवाइयां और अन्य मेडिकल सप्लाई शामिल हैं। यह सहायता ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंप दी गई है। ऐसे समय में जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं, भारत का यह कदम मानवीय सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है। भारत में मौजूद ईरान के दूतावास ने इस मदद के लिए भारतीय जनता और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। दूतावास की ओर से कहा गया कि मेडिकल सामग्री सुरक्षित रूप से ईरान पहुंचा दी गई है।

यह सहयोग भारत के लोगों की ओर से मिला एक अहम समर्थन है। दूतावास ने इस पूरी प्रक्रिया का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें राहत सामग्री को रेड क्रिसेंट के अधिकारियों को सौंपते हुए दिखाया गया।

भारत का मानवीय कदम

इस मानवीय पहल के समानांतर क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खातिब को एक हवाई हमले में मार गिराया है। हालांकि इस दावे की अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह खबर सही साबित होती है तो इसे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है। इसी बीच ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर भी एक अहम खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा स्थित अडाणी पोर्ट पर पहुंच गया है।

यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट से रवाना होकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते हुए भारत पहुंचा। जहाज में करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा जरूरतें और तेल आपूर्ति

भारत दुनिया के बड़े तेल उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में रोजाना करीब 5.5 से 5.6 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत होती है, जो लगभग 90 करोड़ लीटर के बराबर है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण भारत लगातार अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इस्माइल खातिब को ईरान के सत्ता ढांचे में बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक वह देश के राजनीतिक और धार्मिक तंत्र में मजबूत पकड़ रखते थे। उनकी विचारधारा और नजदीकी संबंध पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़े बताए जाते हैं, जिसके कारण उन्हें सत्ता प्रतिष्ठान में काफी महत्व दिया जाता था।

धार्मिक पद और खुफिया अनुभव

खातिब को ईरान में ‘हुज्जत-उल-इस्लाम’ की उपाधि मिली हुई थी, जो वहां के उच्च धार्मिक पदों में गिनी जाती है। इसके साथ ही उन्हें खुफिया तंत्र में दशकों का अनुभव था। खास तौर पर नागरिक खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम बताई जाती है। यही कारण है कि उन्हें ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इजराइल का दावा सही निकलता है तो यह उसकी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

माना जा रहा है कि इजराइल उन प्रमुख व्यक्तियों को निशाना बना रहा है जो ईरान की सत्ता और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाए रखते हैं। ऐसे हमलों से सत्ता तंत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया के हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

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