Indian Railways Rules: कोरोना के बाद जब से एसी कोच में बेडरोल की सुविधा दोबारा शुरू हुई है, तब से चोरी की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। अब रेलवे ने इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच करीब 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हुए। 2022 से 2025 के बीच चोरी में 56 फीसदी का उछाल आया। इस वजह से बेडरोल का ठेका लेने वाली कंपनियों को 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में ’52 हफ्तों में 52 सुधार’ कार्यक्रम में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि चोरी रोकने के लिए ठोस योजना कब तक आएगी। अधिकारियों ने दो महीने का समय मांगा है और कहा है कि इस अवधि में कानूनी और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
रेलवे की नई योजना क्या है?
- RFID और सेंसर: हर चादर, तौलिया और कंबल में बारीक RFID चिप लगाई जाएगी। ट्रेन के एग्जिट गेट पर ऐसे सेंसर लगाए जाएंगे, जो बिना रुके सामान की पहचान कर सकें।
- RPF को ज्यादा अधिकार: विचार है कि रेलवे सुरक्षा बल को संदिग्ध यात्री की मौके पर तलाशी लेने और गिरफ्तारी का अधिकार दिया जाए। उतरने से पहले बेडरोल वापस न करने पर सामान की जांच की जा सकेगी।
- स्टाफ की निगरानी: बेडरोल अटेंडेंट को अधिक सतर्क रहने और सामान की तुरंत वसूली करने के लिए काउंसिलिंग दी जा रही है।
रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत ट्रेन से तौलिया या चादर ले जाना गैर-जमानती अपराध है। 2015 की गाइडलाइन में यात्रियों को उतरने से 30 मिनट पहले बेडरोल स्टाफ को लौटाने की सलाह दी गई थी।
रेलवे का कहना है कि यह सिर्फ सरकारी संपत्ति बचाने का मामला नहीं है। हर चोरी की लागत अंत में टिकट और सेवा पर असर डालती है। इसलिए अगले 2 महीनों में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।
Written by- Mansi Sharma
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