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दूषित पेयजल से 17 मौतें: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की छवि पर लगा कलंक, एमपी हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, पढ़े रिर्पोट

Indore water crisis: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर दूषित पेयजल से हुई मौतों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 17 लोगों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई जारी है। कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि इस घटना से इंदौर शहर की प्रतिष्ठा को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

पीने के पानी पर संकट, जीवन के अधिकार पर चोट

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पीने का पानी ही दूषित हो जाए, तो यह नागरिकों के जीवन के अधिकार पर सीधा प्रहार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं मानी जा सकती, बल्कि इससे पूरे शहर के पेयजल की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। इसी कारण कोर्ट ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को सुनने की आवश्यकता जताई है।

Indore water crisis: 17 मौतें, 110 मरीज अब भी अस्पताल में

दूषित पानी के सेवन से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं। प्रशासन के अनुसार कुल 421 मरीजों को अब तक अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 311 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। 15 मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है। इसके अलावा उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया है।

कोर्ट के निर्देशों के बावजूद दूषित पानी की आपूर्ति

याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट द्वारा स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में अब भी दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पानी न तो स्वच्छ है और न ही पीने योग्य।

Indore water crisis
 Indore water crisis

Indore water crisis: शिकायतों को किया गया नजरअंदाज

याचिकाओं में यह भी कहा गया कि घटना से पहले स्थानीय निवासियों ने बार-बार दूषित पानी की शिकायतें प्रशासन से की थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता और सुधारात्मक कदम उठाए जाते, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पेयजल सुधार योजना फाइलों में ही अटकी

सीनियर काउंसिल ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि वर्ष 2022 में महापौर द्वारा पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका।

Indore water crisis: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर भी चुप्पी

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि वर्ष 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 जल सैंपलों में से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए थे। इसके बावजूद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी न केवल प्रशासनिक, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। इसी आधार पर उन्होंने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है।

हाईकोर्ट ने मांगी नई स्टेटस रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को विस्तृत जवाब दाखिल करने और नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों- आपात निर्देश, रोकथाम, जिम्मेदारी तय करना, अनुशासनात्मक कार्रवाई, मुआवजा, स्थानीय निकायों के निर्देश और जन-जागरूकता में वर्गीकृत किया है।

टैंकरों से पानी, अधिकारियों पर कार्रवाई

इस बीच नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जा रही है। स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित किया गया है, जबकि एक सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

रिटायर्ड पुलिसकर्मी की मौत से बढ़ा मृतकों का आंकड़ा

सोमवार को इस मामले में 69 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई। परिजनों के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से उनकी किडनी खराब हो गई थी, जिसके बाद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो सका।

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