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Jewar Airport बना देश का पहला बड़ा प्रोजेक्ट, जहां इस्तेमाल हो रहा है ग्रीन सीमेंट; जानें इसके फायदे

Jewar Airport Noida : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट सिर्फ अपने विशाल आकार की वजह से ही नहीं, बल्कि एक नई पर्यावरण-अनुकूल पहल के कारण भी चर्चा में है. यह देश का पहला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसके निर्माण में ग्रीन सीमेंट (LC3) का इस्तेमाल किया गया है. यह सीमेंट पारंपरिक सीमेंट की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करता है और कार्बन उत्सर्जन भी काफी कम करता है.

इसे ऐसे पत्थरों और मिट्टी से तैयार किया जाता है, जिन्हें सामान्य तौर पर बेकार या कम उपयोगी माना जाता है. फिलहाल इसका उत्पादन सीमित है, इसलिए इसकी कीमत सामान्य सीमेंट से अधिक है, लेकिन भविष्य में उत्पादन बढ़ने के साथ इसकी लागत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है.

Jewar Airport: क्या है ग्रीन सीमेंट (LC3)?

सामान्य सीमेंट बनाने में क्लिंकर का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है, जबकि ग्रीन सीमेंट यानी LC3 में क्लिंकर की मात्रा कम रखी जाती है. इसकी जगह तपी हुई मिट्टी (Calcined Clay) और चूना पत्थर का अधिक उपयोग किया जाता है. इस तकनीक को IIT दिल्ली, IIT मद्रास, स्विट्जरलैंड के EPFL और अन्य संस्थानों ने मिलकर विकसित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन सीमेंट से बनी इमारतें सामान्य सीमेंट से बनी इमारतों जितनी ही मजबूत होती हैं. कई परिस्थितियों में इसकी टिकाऊ क्षमता और भी बेहतर मानी जाती है. फिलहाल, उत्पादन कम होने के कारण इसकी कीमत ज्यादा है, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद इसकी लागत घटने की संभावना है.

पर्यावरण के लिए क्यों है बेहतर?

ग्रीन सीमेंट तैयार करने के लिए करीब 800 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, जबकि पारंपरिक सीमेंट के लिए लगभग 1450 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए. इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन लगभग 40 प्रतिशत तक घट जाता है. यही वजह है कि इसे भविष्य का पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री माना जा रहा है.

किन चीजों से बनता है?

LC3 बनाने में कम गुणवत्ता वाली तपी हुई मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जो खेती या अन्य कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होती. इसके साथ ही ऐसे चूना पत्थर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे सामान्य सीमेंट निर्माता अक्सर बेकार समझकर छोड़ देते हैं. इसके कारण क्लिंकर की जरूरत लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिससे प्रदूषण भी घटता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े सीमेंट उत्पादक देशों में शामिल है. ऐसे में यदि भविष्य में सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं में LC3 का इस्तेमाल बढ़ता है, तो इससे ऊर्जा की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी लाई जा सकेगी. यही कारण है कि ग्रीन सीमेंट को निर्माण क्षेत्र का भविष्य माना जा रहा है.

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Sanjucta