Jk news: शनिवार शाम जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। झटके लगते ही लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, शाम 7 बजकर 4 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 6.2 दर्ज की गई। इसका केंद्र अफगानिस्तान में था और इसकी गहराई जमीन से करीब 215 किलोमीटर नीचे थी। फिलहाल जम्मू-कश्मीर से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही
दूसरी ओर, हाल ही में वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद अब तक 920 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,360 से अधिक लोगों के घायल होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
Jk news: भारत में कौन-कौन से हैं भूकंप जोन?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का करीब 59 प्रतिशत भूभाग भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। देश को चार भूकंपीय जोन—जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 में बांटा गया है। इनमें जोन-5 सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला क्षेत्र है। राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां भविष्य में बड़े भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत और कच्छ जैसे इलाके सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
Jk news: रिक्टर स्केल पर क्या मतलब होती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की ताकत रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप घरों का सामान गिरा सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता में भारी फर्नीचर भी हिलने लगता है। 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप में बड़े पैमाने पर तबाही की आशंका रहती है। 8 या उससे अधिक तीव्रता होने पर सुनामी जैसी आपदाओं का भी खतरा बढ़ जाता है।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप?
Jk news: धरती के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या इनके बीच घर्षण होता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में महसूस होती है। इसी वजह से हिमालयी क्षेत्र और प्लेटों की सीमाओं के आसपास भूकंप का खतरा सबसे अधिक बना रहता है।
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