Home » राष्ट्रीय » 80 साल पुराने जल विवाद का निकलेगा हल, जानें हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली के लिए क्यों अहम है यह परियोजना

80 साल पुराने जल विवाद का निकलेगा हल, जानें हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली के लिए क्यों अहम है यह परियोजना

किशाऊ परियोजना से हिमाचल को मिलेगा बड़ा लाभ

Kishau Dam Project: नई दिल्ली में मंगलवार को किशाऊ बांध परियोजना को लेकर 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ बैठक हुई। इस दौरान करीब 80 साल से चले आ रहे जल विवाद पर चर्चा की गई और परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर सहमति बनी। इस बैठक में परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया। आखिर बैठक में क्या फैसला हुआ, किन राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल हुए, हिमाचल और हरियाणा के लिए किशाऊ परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है और इस परियोजना से दिल्ली को क्या लाभ मिलेगा, आइए जानते हैं।

6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक

मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह शामिल हुए। बैठक का मुख्य विषय किशाऊ बांध परियोजना को आगे बढ़ाना और इससे जुड़े राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर करना था।

Kishau Dam Project: क्या है किशाऊ बांध परियोजना?

किशाऊ एक बहुउद्देशीय बांध परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य यमुना और उसकी सहायक नदियों के पानी को अलग-अलग राज्यों के बीच बांटना है, ताकि संबंधित राज्यों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सके। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया था। हालांकि, राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण यह लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

Kishau Dam Project: किशाऊ परियोजना से हिमाचल को मिलेगा बड़ा लाभ
किशाऊ परियोजना से हिमाचल को मिलेगा बड़ा लाभ
80 साल पहले हुई थी परियोजना की शुरुआत

किशाऊ परियोजना की योजना आजादी से पहले वर्ष 1940 में बनाई गई थी। इसके बाद वर्ष 1945 में तत्कालीन पंजाब सरकार ने इस परियोजना का सर्वे भी कराया था। हालांकि, बाद में इस काम को रोक दिया गया।कुछ समय बाद परियोजना से जुड़ी फाइल दोबारा तैयार की गई, लेकिन मामला फिर आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद कभी राज्यों के पुनर्गठन तो कभी आपसी असहमति के कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। इस तरह करीब 80 वर्षों तक यह परियोजना लंबित रही।

Kishau Dam Project: किशाऊ बांध परियोजना: कब-क्या हुआ?

किशाऊ बांध परियोजना का इतिहास कई दशकों पुराना है। इस परियोजना को लेकर अलग-अलग वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, लेकिन राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण यह लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

1940: किशाऊ बांध परियोजना की पहली बार परिकल्पना की गई थी। राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण परियोजना कई वर्षों तक अटकी रही।

12 मई 1994: ऊपरी यमुना बेसिन में जल के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ। इसमें अलग-अलग भंडारण परियोजनाओं के लिए अलग समझौते किए जाने का प्रावधान रखा गया था।

20 जून 2015: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच परियोजना के लिए संयुक्त उद्यम बनाने को लेकर समझौता हुआ।

16 जनवरी 2017: परियोजना के क्रियान्वयन के लिए किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड नाम की कंपनी का गठन किया गया।

15 सितंबर 2026: लंबे समय से चली आ रही अड़चनों और कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार और 6 राज्यों के बीच परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

Kishau Dam Project: किशाऊ बांध से हरियाणा और हिमाचल को लाभ
किशाऊ बांध से हरियाणा और हिमाचल को लाभ
Kishau Dam Project: बैठक में क्या तय हुआ?

मंगलवार को हुई बैठक में किशाऊ बांध परियोजना को लेकर कई अहम फैसले किए गए। तय योजना के अनुसार दिल्ली को यमुना के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा करीब 97 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी और 148 करोड़ यूनिट पनबिजली का उत्पादन किया जाएगा।परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास टोंस नदी पर 233 मीटर ऊंचा कंक्रीट का ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। इसमें करीब 156 करोड़ घन मीटर पानी जमा किया जा सकेगा। इसके बाद इस पानी को संबंधित राज्यों के बीच बांटा जाएगा, जिसका उपयोग सिंचाई, बिजली उत्पादन और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।परियोजना की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी खर्च राज्यों को उठाना होगा।

हरियाणा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है किशाऊ?

हरियाणा के लिए किशाऊ परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य लंबे समय से ऊपरी यमुना क्षेत्र में पानी के भंडारण को बढ़ाने की मांग करता रहा है।वर्ष 2018 में लखवार परियोजना को लेकर राज्यों के बीच सहमति बनी थी। इसके बाद रेणुकाजी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2019 में समझौता किया गया। इन दोनों परियोजनाओं से यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, वर्ष 2026 में हरियाणा और राजस्थान के बीच वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते को लागू करने के लिए अलग से समझौता ज्ञापन भी हुआ था।

मुख्यमंत्री नायब सिंह ने कहा कि यमुना में हरियाणा की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है। ऐसे में यमुना बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ने का सीधा फायदा हरियाणा को मिलेगा।किशाऊ के साथ रेणुकाजी और लखवार परियोजनाएं भी हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। बताया गया कि रेणुकाजी और लखवार परियोजनाओं में पहले ही पानी का बंटवारा कर दिया गया था, जिससे नदी में अतिरिक्त पानी की उपलब्धता का मुद्दा बना हुआ था। अब किशाऊ परियोजना को लेकर समझौते के बाद इसके निर्माण का रास्ता भी साफ हुआ है।इन तीनों परियोजनाओं के पूरा होने से कुल 2676 क्यूसेक पानी की उपलब्धता बढ़ने की बात कही गई है। इसमें से 1280 क्यूसेक पानी हरियाणा के हिस्से में आने की बात है। इन परियोजनाओं से हरियाणा को करीब 1143 एमसीएम पानी मिलने का अनुमान है।

किशाऊ बांध से हरियाणा और हिमाचल को लाभ
किशाऊ बांध से हरियाणा और हिमाचल को लाभ
Kishau Dam Project: हिमाचल को कैसे होगा फायदा?

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से हिमाचल प्रदेश को भी आर्थिक लाभ मिलने की बात कही गई है। परियोजना में अपने हिस्से की बिजली के लिए हिमाचल को करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च करने थे। अब यह लागत दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा वहन की जाएगी।केंद्रीय गृहमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र ने सैद्धांतिक रूप से दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा इस लागत को उठाने पर सहमति जताई।

इससे पहले पिछली सरकार ने राज्य के हिस्से के तौर पर 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों और परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अनुसार, परियोजना बनने के बाद हिमाचल को बिजली के हिस्से के रूप में हर साल करीब 1000 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। इसकी अनुमानित कीमत 1200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

दिल्ली को भी मिलेगा पानी

किशाऊ परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दिल्ली को यमुना के जरिए पानी उपलब्ध कराना भी है। परियोजना के तहत जमा किए जाने वाले पानी का राज्यों के बीच वितरण किया जाएगा, जिससे दिल्ली समेत संबंधित राज्यों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी मिल सकेगा।