Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार और भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं। उन्होंने भाजपा को रोकने के लिए देशभर की भाजपा विरोधी राजनीतिक ताकतों से एकजुट होने का आह्वान किया। ममता बनर्जी ने कहा कि अब समय आ गया है जब सभी समान विचारधारा वाले दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाना चाहिए।
भाजपा विरोधी दलों को साथ आने का न्योता
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि वह भाजपा के खिलाफ किसी भी दल के साथ काम करने को तैयार हैं। उन्होंने वामपंथी, दक्षिणपंथी और अन्य राष्ट्रीय दलों से भी एकजुट होने की अपील की। ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं और लोकतांत्रिक ताकतों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए व्यापक गठबंधन की जरूरत है।
Mamata Banerjee: वाम दलों के लिए भी खोले दरवाजे
राजनीतिक रूप से लंबे समय तक वाम दलों की कट्टर विरोधी रहीं ममता बनर्जी ने इस बार सीपीआई(एम) और वाम मोर्चे को भी साथ आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए हर उस दल का स्वागत है जो लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में विश्वास रखता है। ममता ने कहा कि कोई भी उनसे संपर्क कर सकता है और वह प्रतिदिन शाम चार बजे से छह बजे तक अपने कार्यालय में मौजूद रहेंगी।
वाम नेताओं की प्रतिक्रिया भी आई सामने
ममता बनर्जी के इस बयान पर सीपीआई(एम) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी के वरिष्ठ नेता मो. सलीम ने सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कविता की पंक्तियां उद्धृत कीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह प्रतिक्रिया इस ओर इशारा करती है कि तृणमूल कांग्रेस को चुनावी हार के बाद अब विपक्षी दलों की अहमियत समझ में आने लगी है।
Mamata Banerjee: चुनावी हार के बाद बदला राजनीतिक रुख
हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। ममता बनर्जी खुद भी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। इसके बाद अब उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रही हैं।








