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MAYAWATI NEWS: नाइट कैंपिंग, नए समीकरण के साथ 2027 की बड़ी तैयारी में जुटी मायावती

MAYAWATI NEWS: लखनऊ में मायावती की रैली को अक्सर भीड़ के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ और है। रैली में जुटी भीड़ ने सिर्फ नारे नहीं लगाए, बल्कि अपने साथ रोटियां बाँधकर लाई यह संकेत है कि बसपा का कोर वोटर अब भी ‘निवेश’ करने को तैयार है। राजनीतिक जानकार इसे महज़ जनसैलाब की वापसी नहीं बल्कि मायावती के “साइलेंट रिसेट मोड” की शुरुआत मान रहे हैं।

2007 का मॉडल फिर क्या होगा एक्टिव?

2007 के बाद से बसपा के ग्राफ में लगातार गिरावट आई। पर मायावती की रणनीति में पहली बार ऐसा दिख रहा है कि वह अब वोट बैंक को मुस्लिम- दलित समीकरण तक सीमित नहीं रख रहीं, बल्कि “कैडर की ऊर्जा” फिर से खड़ी करने का टास्क खुद संभाल रही हैं। बसपा के स्रोत बताते हैं कि इस बार मायावती का मिशन सीधा है दलितों के बीच खोया भरोसा वापस लाना और उन्हें यह यकीन दिलाना कि पार्टी अब सिर्फ चुनावी मशीन नहीं, फिर से आंदोलन बन रही है।

MAYAWATI NEWS: ‘आदेश वाली या सुनने वाली नेता’ बनेंगी

बसपा के अंदर इसे “ऑपरेशन अटैचमेंट” नाम दिया गया है। 18 मंडलों में नाइट कैंपिंग सिर्फ राजनीतिक मौजूदगी भर नहीं, बल्कि एक संकेत है कि मायावती खुद कैडर के बीच यह बताने उतर रही हैं कि “बहनजी दूर नहीं गई थीं, बस रणनीति बदल गई थी।”

MAYAWATI NEWS: इन नाइट कैंपों में होने जा रहा है—

* कार्यकर्ताओं की सीधी शिकायत-सुनवाई
* बूथ स्तर पर नये चेहरों की भर्ती
* पुराने नेताओं और युवा कैडर के बीच गैप को खत्म करना
* सोशल मीडिया पर बसपा की नई डिजिटल टीम का गठन कर पार्टी में इसे “ग्राउंड फ्यूल रिचार्ज” कहा जा रहा है।

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MAYAWATI NEWS: अखिलेश पर हमला, बीजेपी पर दूरी

दलित-मुस्लिम समीकरण को बसपा के अंदरूनी सर्कल में “MY की काट” कहा जा रहा है। कुछ वरिष्ठ पत्रकार मानते हैं कि यह फार्मूला सपा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। अंदर की चर्चा यह भी है कि मायावती और ओवैसी के बीच सीट शेयरिंग लगभग तैयार है। यह गठजोड़ सपा के लिए 2027 का बड़ा सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि दलितों के दुख का सबसे बड़ा टारगेट यादवों को ही माना जाता रहा है, और इस भावनात्मक समीकरण को बसपा इस बार खुले तौर पर कैश करने की रणनीति बना रही है।

MAYAWATI NEWS: बसपा की “त्रयी” दोबारा एक्टिव

पार्टी में इस समय सबसे बड़ा बदलाव यही है कि सतीश चंद्र मिश्रा फिर सेंटर फ्रेम में आ गए हैं। साथ ही आकाश के साथ उनके रिश्ते सुधर चुके हैं, और यह तिकड़ी मायावती, आकाश, मिश्रा 2027 की रणनीति को मिलकर चला रही है। स्रोत बताते हैं कि मायावती की योजना साफ है “कांशीराम–मायावती मॉडल को आगे बढ़ाने का चेहरा अब आकाश होंगे। क्यों जरूरी है मायावती की यह आक्रामक वापसी? क्योंकि दलित राजनीति में खाली जगह टिकती नहीं भर ली जाती है। उनकी अनुपस्थिति में चंद्रशेखर आजाद जैसे नए चेहरे उभरे। बसपा मानती है कि अगर मायावती खुद आगे नहीं आईं तो आने वाले चुनावों में दलित वोट निर्णायक रूप से खिसक सकता है। इसीलिए यह पूरी रणनीति इस बार सिर्फ चुनावी नहीं बल्कि वर्चस्व वापस लेने की है।

 बसपा के लिए ‘कमबैक सिग्नल’

नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर जैसे इलाकों में बसपा का वोट बैंक पिछले 10 सालों में टूट चुका है। मायावती 6 दिसंबर की रैली से यह संदेश देने जा रही हैं कि “बसपा की मशीनरी बंद नहीं पड़ी, सिर्फ सर्विसिंग चल रही थी।”

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