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मोहन भागवत बोले- जेन-जी देशविरोधी नहीं, लोकतंत्र में संवाद जरूरी

Mohan Bhagwat on GenZ: मोहन भागवत बोले- जेन-जी देशविरोधी नहीं
New Delhi: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) chief Mohan Bhagwat speaks during the 18th M.L. Munjal Awards ceremony in New Delhi on Monday, June 15, 2026. (Photo: IANS/Deepak Kumar)

Mohan Bhagwat on GenZ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने छात्र आंदोलनों, नई पीढ़ी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। एक छात्र संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि जेन-जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उनके अनुसार, नई पीढ़ी की चिंताओं को समझने और उनका समाधान संवाद के माध्यम से तलाशने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध भी व्यवस्था सुधार का एक वैध माध्यम है।

जेन-जी पर जताया भरोसा, संवाद को बताया समाधान

मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी और जेन अल्फा पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक सवाल पूछती हैं और हर विषय पर तार्किक उत्तर चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का हिस्सा है। उनके अनुसार, भारत की परंपरा में ‘शास्त्रार्थ’ यानी विचार-विमर्श के जरिए सत्य तक पहुंचने की संस्कृति रही है। उन्होंने कहा कि युवा किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इसलिए उनकी बात सुनना और विश्वास के साथ संवाद करना जरूरी है।

Mohan Bhagwat on GenZ: शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर दिया जोर

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि छात्रों की शिकायतें वास्तविक हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था में अभी कई सुधार किए जाने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार या कमाई नहीं, बल्कि बेहतर नागरिक तैयार करना होना चाहिए। भागवत ने शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में रिक्त शिक्षक पदों को भरना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने शिक्षा पर सकल बजट का छह प्रतिशत खर्च किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग का भी समर्थन किया।

सोशल मीडिया, राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज पर भी रखे विचार

भागवत ने सोशल मीडिया पर बढ़ती फर्जी सूचनाओं को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की सोच और जागरूकता भी विकसित करनी होगी। पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि युद्ध या आतंकवाद जैसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए, हालांकि संवाद के रास्ते हमेशा के लिए बंद नहीं किए जा सकते। एलजीबीटी समुदाय पर उन्होंने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकारी हैं। वहीं महिलाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर और प्रशिक्षण मिलना चाहिए।

 

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