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‘रुपये दो और डिग्री लो’ मॉडल का खुलासा, जांच में सामने आईं चौंकाने वाली बातें

Monad University Case:

Monad University Case: मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्रियों को वैध साबित करने के लिए एक गोपनीय डेस्क संचालित की जा रही थी। जांच में सामने आया कि सत्यापन के लिए भेजी गई डिग्रियों को बिना किसी रिकॉर्ड के असली घोषित कर दिया जाता था। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यूनिवर्सिटी ने रिकॉर्ड रूम में आग लगने की रिपोर्ट भी दर्ज करा रखी थी।

Monad University Case: पढ़ाई और परीक्षा का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला-

पलवल जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा के पति नरेंद्र सिंह की शिकायत पर जांच शुरू हुई। उन्होंने बताया कि पंचायत में संविदा पर कार्यरत 24 युवकों की डिग्रियां मोनाड यूनिवर्सिटी की हैं। जांच में पता चला कि इन छात्रों के पढ़ाई या परीक्षा देने का कोई रिकॉर्ड नहीं है, फिर भी यूनिवर्सिटी ने उनकी डिग्रियों को सत्यापित कर दिया था।

Monad University Case: विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहे हैं दर्जनों लोग-

जांच में यह भी सामने आया कि पलवल के अलग-अलग सरकारी विभागों में मोनाड यूनिवर्सिटी की डिग्रियों के आधार पर 74 लोग नौकरी कर रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी कोर्ट से स्टे लेकर सेवा में बने हुए हैं।

Monad University Case: पीएचडी डिग्रियों की भी थोक में बिक्री का शक-

अधिकारियों को आशंका है कि यूनिवर्सिटी ने बड़ी संख्या में पीएचडी की डिग्रियां भी बेची हैं। सूत्रों के मुताबिक, पांच वर्षों में मोनाड ने कई पुरानी यूनिवर्सिटियों से अधिक पीएचडी डिग्रियां जारी कीं।

फर्जी डिग्रीधारियों को नौकरी दिलाने में भी मदद-

जांच में खुलासा हुआ कि यूनिवर्सिटी सिर्फ डिग्री बेचने तक सीमित नहीं थी। गुरुग्राम की एक प्लेसमेंट कंपनी के जरिए सैकड़ों डिग्रीधारियों को देश-विदेश की मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी दिलाई गई। इससे फर्जी डिग्रियों पर लोगों का भरोसा और बढ़ता गया।

असली जैसी दिखती थीं नकली डिग्रियां-

फर्जी डिग्रियों को इस तरह तैयार किया जाता था कि कागज, प्रिंट और फॉन्ट तक असली दस्तावेजों जैसे दिखें। यदि कोई कंपनी सत्यापन के लिए संपर्क करती तो यूनिवर्सिटी की ओर से डिग्री को वैध बताया जाता था।

रिकॉर्ड मांगने पर आग में जलने की कहानी-

जब कुछ कंपनियों की टीमें सीधे यूनिवर्सिटी पहुंचकर रिकॉर्ड देखना चाहती थीं, तब उन्हें बताया जाता था कि आग लगने से रिकॉर्ड नष्ट हो चुका है। इसके बावजूद संबंधित डिग्रियों को असली बताया जाता रहा।

एसटीएफ की जांच प्लेसमेंट कंपनियों तक पहुंची-

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ अब उन प्लेसमेंट कंपनियों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने मोनाड यूनिवर्सिटी के डिग्रीधारियों को नौकरी दिलाने में भूमिका निभाई थी।

जांच अधिकारी ने क्या कहा-

सीडीओ और जांच अधिकारी श्रुति शर्मा ने कहा, “मामला बेहद गंभीर है। उपलब्ध रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।”

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