नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा एक वायरल वीडियो को लेकर विवादों में घिर गई हैं। सामने आए वीडियो में प्रियंका गांधी को पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी की ओर कोहनी मारते और धक्का देते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने प्रियंका गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। दिल्ली पुलिस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी के कई वीडियो की जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
New Delhi News: वीडियो में आखिर क्या दिखाई दे रहा है?
वायरल वीडियो उस समय का बताया जा रहा है, जब प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं को प्रदर्शन स्थल से हटाकर हिरासत में लिया जा रहा था। वीडियो में महिला पुलिसकर्मी प्रियंका गांधी को उठाकर पुलिस वाहन की तरफ ले जाने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान प्रियंका गांधी की तरफ से हाथ और कोहनी की हरकत दिखाई देती है जिसमे प्रियंका गांधी महिला पुलिसकर्मी को कोहनी मारती नजर या रही हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या विरोध दर्ज कराने के नाम पर ड्यूटी कर रही महिला पुलिसकर्मी के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है। वीडियो के पूरे संदर्भ और घटनाक्रम की जांच पुलिस कर रही है। इसलिए फिलहाल इसे आरोप और वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन पुलिस से टकराव कहां तक?
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन विपक्ष का अधिकार है। सरकार या किसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ आवाज उठाना भी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन यही अधिकार उस समय सवालों के घेरे में आता है जब प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों से शारीरिक टकराव की स्थिति पैदा हो। इस मामले में सवाल सिर्फ प्रियंका गांधी तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन में शामिल किसी भी नेता या कार्यकर्ता का पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की या हाथापाई करना लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादा को कमजोर करता है। खास तौर पर जब सामने महिला पुलिसकर्मी हो, तब सार्वजनिक जीवन में सक्रिय किसी बड़े राजनीतिक चेहरे से संयम की अपेक्षा और बढ़ जाती है।
New Delhi News: बीजेपी ने वीडियो शेयर कर प्रियंका को घेरा
बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर करते हुए प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार कर रही थीं और इसे महिला सम्मान की राजनीति से जोड़कर सवाल उठाया। राजनीतिक दलों के आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन वीडियो के सामने आने के बाद एक व्यापक सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या सड़क पर विरोध प्रदर्शन करते समय राजनीतिक नेताओं के लिए भी कोई आचार-सीमा नहीं होनी चाहिए?
प्रियंका गांधी ने भी पुलिस पर लगाए थे आरोप
इस घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने और खरोंचने का आरोप लगाया था। उन्होंने सड़क पर बैठकर हिरासत का विरोध भी किया और पुलिस द्वारा उन्हें जबरन हटाए जाने पर आपत्ति जताई। यानी घटनाक्रम में दोनों तरफ से आरोप सामने आए हैं। पुलिस जहां प्रदर्शनकारियों के कथित हमले और बाधा डालने की जांच कर रही है, वहीं विपक्ष पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में किसी एक वायरल क्लिप के आधार पर पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच के नतीजे का इंतजार करना जरूरी है।
सड़क पर सियासत का स्तर कितना नीचे जाएगा?
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी चिंता यही है कि राजनीतिक विरोध कहीं व्यक्तिगत टकराव और धक्का-मुक्की में न बदल जाए। नेताओं के पास अपनी बात रखने के लिए संसद, प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जैसे तमाम लोकतांत्रिक रास्ते मौजूद हैं। पुलिस का काम भीड़ को नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में पुलिसकर्मी जब किसी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने की कार्रवाई करते हैं, तब दोनों तरफ से संयम जरूरी है। पुलिस को भी कार्रवाई में तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और नेताओं-कार्यकर्ताओं को भी ड्यूटी कर रहे जवानों के साथ शारीरिक टकराव से बचना चाहिए।
New Delhi News: प्रियंका गांधी के वीडियो ने क्यों बढ़ाई राजनीतिक बहस?
प्रियंका गांधी कांग्रेस की प्रमुख नेताओं में हैं और खुद महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं। ऐसे में महिला पुलिसकर्मी के साथ उनके कथित व्यवहार वाला वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का राजनीतिक मौका मिला है। वहीं कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के संदर्भ में देख रही है। लेकिन राजनीतिक बयानबाजी से अलग एक सामान्य सवाल बना रहता है कि विरोध कितना भी बड़ा मुद्दा हो, क्या पुलिसकर्मी के साथ शारीरिक टकराव उसका हिस्सा होना चाहिए? लोकतांत्रिक विरोध की ताकत उसकी आवाज में होती है, हाथापाई में नहीं। अगर वीडियो में दिखाई दे रही हरकत जांच में जानबूझकर की गई शारीरिक कार्रवाई साबित होती है, तो यह निश्चित रूप से राजनीतिक विरोध की स्वीकार्य सीमा से आगे जाने का मामला होगा। और अगर जांच में संदर्भ कुछ अलग निकलता है, तो उसी के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। फिलहाल इतना साफ है कि प्रियंका गांधी से जुड़ा यह वीडियो अब सिर्फ सोशल मीडिया विवाद नहीं रहा है। दिल्ली पुलिस इसकी जांच कर रही है और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट को लेकर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी सामने आ चुकी है। विरोध लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन विरोध के दौरान कानून और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की गरिमा बनाए रखना भी उसी लोकतंत्र की जिम्मेदारी है।