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भारत का बड़ा कदम: परमाणु ऊर्जा से चलने वाले दुनिया के पहले हाइड्रोजन केंद्र की शुरुआत

Nuclear Hydrogen Plant India:

Nuclear Hydrogen Plant India: भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और अत्याधुनिक परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने शुक्रवार को तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) में परमाणु ऊर्जा से संचालित दुनिया के पहले हाइड्रोजन उत्पादन केंद्र की स्थापना की। यह केंद्र भविष्य में बड़े पैमाने पर कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Nuclear Hydrogen Plant India: स्वदेशी तकनीक की होगी जांच-

यह हाइड्रोजन केंद्र टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), मुंबई द्वारा विकसित स्वदेशी कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल प्रक्रिया के माध्यम से परमाणु ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन की तकनीक का परीक्षण करना है।

Nuclear Hydrogen Plant India: डीएई प्रमुख ने किया उद्घाटन-

इस केंद्र का उद्घाटन परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने किया। इस दौरान इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक श्रीकुमार जी. पिल्लई भी मौजूद रहे।

कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पादन का रास्ता होगा आसान-

आईजीसीएआर के अनुसार, यह परियोजना भविष्य में अत्याधुनिक परमाणु रिएक्टरों की मदद से बड़े पैमाने पर कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।

क्यों खास है कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल प्रक्रिया-

दुनियाभर में विकसित की जा रही हाइड्रोजन उत्पादन तकनीकों में कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल चक्र को सबसे प्रभावी तकनीकों में गिना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें अपेक्षाकृत कम तापमान पर संचालन संभव है और इसकी थर्मोडायनामिक दक्षता भी अधिक है।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में आएगी कमी-

फास्ट रिएक्टरों से मिलने वाली न्यूक्लियर हीट के उपयोग से यह प्रक्रिया जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को काफी कम करती है। साथ ही पारंपरिक हाइड्रोजन उत्पादन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

वर्षों के शोध और विकास का परिणाम-

इस हाइड्रोजन केंद्र की स्थापना व्यापक शोध, विकास, इंजीनियरिंग डिज़ाइन, उपकरण निर्माण, इंस्टॉलेशन, परीक्षण और कमीशनिंग जैसे कई चरणों के सफल प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि भारत की परमाणु और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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