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पंजाब पुलिस का ‘युवा सांझ’ मॉडल: भटके युवाओं को गैंगस्टर रास्ते से हटाने की बड़ी पहल

Punjab police: पंजाब में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क और नशे की चुनौती के बीच पुलिस ने अब सख्ती के साथ सुधार का रास्ता भी अपनाया है। ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ इसी सोच का हिस्सा है, जिसके जरिए भटके हुए युवाओं तक पहुंच बनाकर उन्हें अपराध की दुनिया से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। यह पहल ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के साथ मिलकर काम कर रही है, जहां एक तरफ अपराधियों पर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को सही दिशा देने पर फोकस है।

कार्यक्रम का उद्देश्य और रणनीति

यह कार्यक्रम युवाओं को आतंकवाद, गन कल्चर, नशाखोरी और अन्य नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने के लिए शुरू किया गया है। पंजाब पुलिस दोहरी रणनीति पर काम कर रही है, एक ओर गैंगस्टरों पर सख्त कार्रवाई और दूसरी ओर युवाओं से संपर्क, काउंसलिंग और निगरानी के जरिए उन्हें सही रास्ते पर लाना।

Punjab police: बैठकें और संवाद सत्र

जनवरी से अब तक इस पहल को मजबूत बनाने के लिए कई अहम बैठकें की गई हैं। पिछले चार महीनों में 5 संवाद सत्र आयोजित किए गए हैं, जबकि आने वाले 8 महीनों में 11 और सत्र करने की योजना है, ताकि कार्यक्रम का दायरा और बढ़ाया जा सके।

Punjab police: सोशल मीडिया से पहचान

पुलिस अब सोशल मीडिया के जरिए भी ऐसे युवाओं की पहचान कर रही है, जो हिंसा या गैंगस्टर कल्चर से प्रभावित हो सकते हैं। अब तक 2,358 युवाओं की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 1,519 की प्रोफाइल ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ पर तैयार की गई है।

काउंसलिंग और पुनर्वास

इस पहल के तहत अब तक 1,490 युवाओं को जागरूक किया गया है और 1,100 से ज्यादा युवा काउंसलिंग सत्रों में शामिल हो चुके हैं। जिला स्तर पर भी सैकड़ों युवाओं को चिन्हित कर उन्हें कार्यक्रम से जोड़ा गया है। साथ ही स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद के जरिए उनके पुनर्वास पर भी काम किया जा रहा है।

जमीनी असर और भागीदारी

Punjab police: जमीनी स्तर पर ‘युवा सांझ’ समितियां काम कर रही हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों के साथ मनोवैज्ञानिक, एनजीओ, रिटायर्ड अधिकारी और समाज के अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि इस पहल से अपराध दर में कमी आई है और कई युवा असामाजिक गतिविधियों से दूर हुए हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

 

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