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शहजाद पूनावाला का विपक्ष पर वार: सत्ता न मिले तो संविधान विरोधी बन जाएंगे?

RahulVisit: भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब “लीडर ऑफ पर्यटन” बन चुके हैं और वर्क मोड की बजाय हमेशा छुट्टी के मूड में रहते हैं।

बर्लिन से वियतनाम तक छुट्टियों का सिलसिला

मीडिया से बातचीत में शहजाद पूनावाला ने कहा कि संसद सत्र के दौरान बर्लिन में छुट्टियां मनाने के बाद राहुल गांधी अभी लौटे ही थे कि नया साल मनाने के लिए वियतनाम रवाना हो गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी अब “परमानेंट वेकेशन मोड” में आ गए हैं।

RahulVisit: पीएम मोदी हमेशा वर्क मोड में : पूनावाला

भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी लगातार वर्क मोड में रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बिहार में चुनाव चल रहे थे, तब राहुल गांधी जंगल सफारी का आनंद ले रहे थे, जिससे साफ है कि वे पार्ट टाइम नेता हैं।

विदेश दौरों पर पारदर्शिता का सवाल

शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी से सवाल किया कि वे विदेश यात्राओं के दौरान किन लोगों से मिलते हैं, इसकी जानकारी देश को क्यों नहीं देते। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि विपक्ष के नेता विदेश में क्या गतिविधियां कर रहे हैं।

RahulVisit: संविधान और लोकतंत्र पर विपक्ष पर हमला

जेजेपी नेता अजय चौटाला और समाजवादी पार्टी नेता रविदास मेहरोत्रा के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूनावाला ने कहा कि भाजपा का विरोध करते-करते कुछ दल अब देश, लोकतंत्र, संविधान और डॉ. अंबेडकर का विरोध करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस ने और अब अन्य दलों ने भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने की बात कही है।

सत्ता न मिली तो क्या संविधान विरोधी बनेंगे?

भाजपा नेता ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इसका मतलब यह है कि अगर जनता आपको सत्ता में नहीं लाएगी, तो आप संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ खड़े हो जाएंगे? उन्होंने कहा कि ऐसी सोच बेहद खतरनाक है।

RahulVisit: डीएमके सरकार पर दोहरे मापदंडों का आरोप

डीएमके को निशाने पर लेते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि तमिलनाडु में हाईकोर्ट जब दरगाह को धार्मिक रीति-रिवाजों की अनुमति देता है, तो सरकार तुरंत उसे मान लेती है। लेकिन जब वही अदालत हिंदुओं को सैकड़ों साल पुरानी परंपरा के अनुसार दीया जलाने की अनुमति देती है, तो डीएमके सरकार उसे रोकती है, पुलिस तैनात करती है और भक्तों पर कार्रवाई करती है।

न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके सरकार फैसले से असहमत होने पर जज पर महाभियोग चलाने तक की कोशिश करती है, जो न्यायपालिका और लोकतंत्र दोनों के लिए गंभीर खतरा है।

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