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सड़क पार करते वक्त हादसा हुआ तो किसे माना जाएगा दोषी? पैदल यात्री या ड्राइवर, जानिए कानून क्या कहता है

सड़क हादसे के बाद किसकी जिम्मेदारी?

Road Accident Rules: दिल्ली में गुरुवार को सड़क हादसे में 55 साल की एक महिला की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, खजूरी फ्लाईओवर के पास महिला सड़क पार कर रही थीं, तभी एक मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी। इसके बाद वह एक ट्रक की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई। सड़क पार करते समय पैदल यात्रियों के वाहन की चपेट में आने की ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। सड़क पर सफर करने वालों में पैदल यात्रियों के लिए जोखिम सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे हादसों के बाद अक्सर सवाल उठता है कि गलती पैदल यात्री की मानी जाएगी या वाहन चालक की। आइए जानते हैं कि इस बारे में नियम क्या कहते हैं।

Road Accident Rules: पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या हैं नियम?

2017 में लागू मोटर व्हीकल्स (ड्राइविंग) रेगुलेशन्स में पैदल यात्रियों को सड़क व्यवस्था का जरूरी हिस्सा माना गया है। नियमों के मुताबिक, वाहन चालक और गाड़ी में बैठे लोगों को पैदल यात्रियों के साथ साइकिल सवारों, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकर ऐसी जगह जहां पैदल यात्री सड़क पार कर रहे हों और वहां ट्रैफिक सिग्नल न हो, वहां पहुंचते समय ड्राइवर को वाहन की रफ्तार कम करनी चाहिए।

सड़क पार करते समय पैदल यात्री को रास्ता देना जरूरी

अगर कोई पैदल यात्री सड़क पार कर रहा है तो वाहन चालक को अपनी रफ्तार कम करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर वाहन रोककर उसे पहले रास्ता देना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के मामले में चालक को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है। इसके अलावा, सड़क के किनारे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ या साइकिल सवारों के लिए अलग रास्ता बना हो तो वहां सामान्य वाहन नहीं चलाया जा सकता। ऐसा केवल पुलिस अधिकारी की अनुमति या ट्रैफिक सिग्नल से इजाजत मिलने पर ही किया जा सकता है।

Road Accident Rules: जेब्रा क्रॉसिंग पर क्या है ड्राइवर की जिम्मेदारी?

जेब्रा क्रॉसिंग या पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पैदल यात्रियों के सड़क पार करने के लिए बनाई जाती है। नियमों के अनुसार, ड्राइवर को ऐसी जगह पहुंचते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ट्रैफिक सिग्नल वाली जगह पर वाहन को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग से पहले रोकना होता है। अगर हरी बत्ती होने के बावजूद कोई पैदल यात्री पहले से इंटरसेक्शन या संबंधित पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पर मौजूद है, तो ड्राइवर को उसे रास्ता देना होता है। हादसे की जांच में यह भी देखा जाता है कि घटना के समय पैदल यात्री कहां था और वाहन किस तरह चलाया जा रहा था।

गलत जगह से सड़क पार करने पर भी पूरी जांच होती है

अगर कोई व्यक्ति सड़क गलत जगह से पार करता है तो केवल इसी आधार पर उसे हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता। जांच के दौरान यह देखा जाता है कि पैदल यात्री किस जगह से सड़क पार कर रहा था, वहां उसके लिए कोई रास्ता या सिग्नल था या नहीं, वाहन की रफ्तार कितनी थी और ड्राइवर के पास हादसा रोकने या वाहन को संभालने के लिए पर्याप्त समय था या नहीं।

अगर हादसे में वाहन चालक के साथ-साथ पीड़ित की भी कुछ लापरवाही सामने आती है, तो अदालत मामले से जुड़े सभी तथ्यों को देखकर जिम्मेदारी तय कर सकती है। इसलिए हर सड़क हादसे में पहले से यह तय नहीं किया जा सकता कि गलती केवल ड्राइवर की थी या केवल पैदल यात्री की। जेब्रा क्रॉसिंग जैसी जगहों पर चालक ने कितनी सावधानी बरती, यह भी हादसे की जांच में अहम होता है।

Road Accident Rules: ड्राइवर की लापरवाही पर हो सकती है कार्रवाई

अगर जांच में पता चलता है कि ड्राइवर ने लापरवाही से या तेज और खतरनाक तरीके से वाहन चलाया, जिससे किसी व्यक्ति की जान को खतरा हुआ या चोट लग सकती थी, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस धारा में सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाना अपराध माना गया है।वहीं, अगर किसी व्यक्ति की मौत वाहन चालक की लापरवाही के कारण होती है और मामला गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

हादसे के बाद ड्राइवर की जिम्मेदारी

मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के तहत अगर हादसे में किसी व्यक्ति को चोट लगती है या संपत्ति को नुकसान होता है, तो ड्राइवर या वाहन के प्रभारी व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि घायल को जल्द से जल्द इलाज दिलाने के लिए उचित कदम उठाए। जरूरत पड़ने पर उसे नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल पहुंचाने में भी मदद करनी होती है।इसके साथ ही पुलिस की ओर से मांगी गई जानकारी देनी होती है और हादसे की सूचना जल्द से जल्द, अधिकतम 24 घंटे के भीतर, नजदीकी पुलिस स्टेशन को देनी होती है।

Road Accident Rules: हादसे के बाद ये 3 काम करना जरूरी

घायल की मदद: घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द उचित इलाज दिलाने की कोशिश करें।

अस्पताल पहुंचाएं: जरूरत पड़ने पर घायल को नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करें।

पुलिस को सूचना दें: हादसे की जानकारी जल्द से जल्द और अधिकतम 24 घंटे के भीतर नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।

पीड़ित परिवार को कैसे मिलता है मुआवजा?

मोटर व्हीकल्स एक्ट में सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजे का भी प्रावधान है। धारा 164 के तहत वाहन के इस्तेमाल से हुए हादसे में मौत होने पर कानूनी वारिसों को 5 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 2.5 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत दावा करने वाले व्यक्ति को वाहन मालिक या वाहन से जुड़ी गलती साबित करना जरूरी नहीं है।इसके अलावा, सड़क हादसे में मौत या चोट के मामलों में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण यानी एमएसीटी के जरिए भी मुआवजे का दावा किया जा सकता है। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 165 ऐसे ट्रिब्यूनल के गठन का प्रावधान करती है।

Road Accident Rules: पैदल यात्री या ड्राइवर, किसकी गलती?

सड़क पार करते समय हुए हादसे में यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि हमेशा पैदल यात्री दोषी होगा या ड्राइवर। कानून दोनों पक्षों के व्यवहार और हादसे की परिस्थितियों को ध्यान में रखता है। पैदल यात्री की जिम्मेदारी है कि वह सड़क सुरक्षित तरीके से पार करे, जबकि वाहन चालक पर सड़क पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतने की जिम्मेदारी होती है।इसलिए सड़क हादसे में जिम्मेदारी तय करने के लिए घटनास्थल से मिले सबूत, ट्रैफिक नियम और पूरे घटनाक्रम की जांच महत्वपूर्ण होती है।