Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने वतन लौटने को लेकर बड़ा बयान दिया है। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रहीं हसीना ने कहा है कि वह इस साल दिसंबर तक बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं। उनका कहना है कि स्वदेश लौटने पर गिरफ्तारी, जेल या यहां तक कि मौत का खतरा भी हो सकता है, लेकिन इन तमाम आशंकाओं के बावजूद उन्होंने वापस जाने का फैसला किया है।समाचार एजेंसी AFP को ईमेल के जरिए दिए इंटरव्यू में 78 वर्षीय शेख हसीना ने कहा कि वह अपने सामने मौजूद खतरों से पूरी तरह वाकिफ हैं। इसके बावजूद उनका इरादा बदलने वाला नहीं है।
‘मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है, मारा भी जा सकता है’
शेख हसीना ने अपनी वापसी से जुड़े खतरों का जिक्र करते हुए कहा, मुझे मारा जा सकता है। मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। मुझे जेल भेजा जा सकता है। मुझे अपनी किस्मत का पूरा पता है। फिर भी मैं वापस जाना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं।हसीना का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर कानूनी मामले और राजनीतिक विवाद बने हुए हैं। उनकी वापसी की घोषणा के बाद एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है।
Sheikh Hasina: अगस्त 2024 में गिर गई थी 15 साल पुरानी सरकार
अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना की करीब 15 साल पुरानी सरकार का अंत हो गया था। विरोध प्रदर्शन इतने व्यापक हो गए थे कि प्रदर्शनकारी उनके आधिकारिक आवास तक पहुंच गए थे। बिगड़ते हालात के बीच हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं।संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सरकार विरोधी आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसा व कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की जान गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में कई कानूनी कार्रवाइयां भी आगे बढ़ीं।
Sheikh Hasina: अदालत के फैसले को हसीना ने बताया ‘राजनीतिक बदला’
नवंबर में ढाका की एक अदालत ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। हालांकि हसीना ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और अदालत के फैसले को खारिज किया है।उनका कहना है कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानून की आड़ में राजनीतिक बदले की कोशिश है। हसीना लगातार अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों से इनकार करती रही हैं।
‘भारत ने प्रत्यर्पण को लेकर मुझसे कोई बात नहीं की’
शेख हसीना ने यह भी साफ किया कि बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने किसी बाहरी दबाव में नहीं लिया है। उन्होंने भारत में अपने प्रवास को सुरक्षित और सम्मानजनक बताते हुए कहा कि भारतीय अधिकारियों ने उनसे प्रत्यर्पण को लेकर कोई चर्चा नहीं की।हसीना के मुताबिक मैं पूरे सम्मान और गरिमा के साथ भारत में रह रही हूं। भारतीय अधिकारियों ने मुझसे प्रत्यर्पण को लेकर कोई बात नहीं की है। अपने देश लौटने का फैसला मैंने खुद लिया है।दूसरी ओर, बांग्लादेश की ओर से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की जा चुकी है। भारत ने इस अनुरोध पर विचार किए जाने की बात कही है।
Sheikh Hasina: सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में आया तनाव
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में भी तनाव देखने को मिला। हालांकि बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशें भी हुई हैं।हसीना ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रस्तावित वापसी को प्रत्यर्पण के मुद्दे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि बांग्लादेश लौटने का फैसला पूरी तरह उनका अपना है और इसके पीछे किसी सरकार या बाहरी पक्ष का दबाव नहीं है।
हसीना सरकार पर लगते रहे थे गंभीर आरोप
अपने लंबे शासनकाल के दौरान शेख हसीना और उनकी सरकार को विपक्ष तथा मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उनकी सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने, विपक्ष को दबाने, न्यायपालिका पर प्रभाव डालने और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।शेख हसीना इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान का हिस्सा हैं।अब उनकी दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की घोषणा ने देश की राजनीति में नया सवाल खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि हसीना वास्तव में कब और किन परिस्थितियों में बांग्लादेश लौटती हैं और वहां पहुंचने के बाद उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाइयां क्या मोड़ लेती हैं।
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