Sugar Price: चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है। रिकॉर्ड तेजी के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमत में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। हालांकि इसका पूरा फायदा अभी खुदरा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में लगातार सप्लाई बनाए रखने के लिए सितंबर से चीनी की बिक्री व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला किया है। वहीं, नए चीनी सीजन की शुरुआत के बाद अक्टूबर और नवंबर में उत्पादन बढ़ने से कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
रिकॉर्ड तेजी के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमत 20% तक घटी
पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 35 प्रतिशत तक का उछाल आया। 20 जुलाई को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये और 26 अगस्त को करीब 65.06 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। हालांकि 27 अगस्त को यह घटकर 64.33 रुपये प्रति किलो रह गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत, जो रिकॉर्ड करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, अब घटकर लगभग 55 रुपये प्रति किलो हो गई है। यानी इसमें करीब 12 रुपये प्रति किलो या लगभग 18 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार ने भी इसे करीब 20 प्रतिशत की गिरावट बताया है।
Sugar Price: सितंबर से हर पखवाड़े मिलेगा बिक्री कोटा
सरकार के मुताबिक कीमतों में तेजी का कारण चीनी की वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी थी। भौतिक सत्यापन में मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक पाया गया। अब सितंबर से मिलों को पूरे महीने का कोटा एक साथ देने के बजाय पखवाड़े के हिसाब से दिया जाएगा। मिलों को तय मात्रा की कम से कम 40 प्रतिशत चीनी पहले सप्ताह में और बाकी अगले सप्ताह में बाजार में भेजनी होगी। इसके अलावा बेची गई चीनी को 7 दिनों के भीतर बाजार के लिए भेजना अनिवार्य होगा।
अक्टूबर-नवंबर में बढ़ेगा उत्पादन, मिल सकती है बड़ी राहत
सरकार के अनुसार गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। अक्टूबर में 10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा और नवंबर में करीब 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सितंबर के दौरान चालू मिलों से करीब 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके सितंबर से सप्लाई बढ़ सकती है और अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर दोबारा दबाव का खतरा बना रहेगा। सरकार की नजर स्टॉक और सप्लाई पर रहने से जमाखोरी रोकने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चीनी बाजार में उतारने की संभावना है।
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