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इटली से आई हाईटेक मशीन करेगी कचरे के पहाड़ का सफाया, रोज 1200 टन होगा निस्तारण

Gwalior Waste Management:

Gwalior Waste Management: ग्वालियर में लंबे समय से कचरा निस्तारण की समस्या अब खत्म होने की उम्मीद जगी है। केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र में जमा करीब 13 लाख टन कचरे के विशाल पहाड़ को हटाने के लिए इटली से हाईटेक मशीन ग्वालियर पहुंच गई है। करीब नौ महीने के इंतजार के बाद आई इस मशीन के अक्टूबर से काम शुरू करने की उम्मीद है। नगर निगम के मुताबिक, मशीन रोजाना 1200 टन कचरे का निस्तारण कर सकेगी।

Gwalior Waste Management: केदारपुर में वर्षों से जमा है 13 लाख टन कचरा-

ग्वालियर के केदारपुर कचरा निस्तारण केंद्र में पिछले कई वर्षों से करीब 13 लाख टन कचरा जमा है। समय के साथ यह कचरा बड़े-बड़े पहाड़ों का रूप ले चुका है। इससे आसपास के लोगों को दुर्गंध, गंदगी और पर्यावरण से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने नई तकनीक का सहारा लिया है।

Gwalior Waste Management: नौ महीने के इंतजार के बाद ग्वालियर पहुंची मशीन-

कचरे के निस्तारण के लिए इटली से मंगाई गई आधुनिक मशीन आखिरकार ग्वालियर पहुंच गई है। नगर निगम ने मशीन के संचालन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्लांट परिसर में मशीन लगाने के लिए जरूरी ढांचा तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी तैयारियां समय पर पूरी होने के बाद अक्टूबर से मशीन का संचालन शुरू किया जा सकता है।

रोजाना 1200 टन कचरे का होगा निस्तारण-

नगर निगम के अनुसार, मशीन की मदद से हर दिन करीब 1200 टन कचरे का निस्तारण किया जाएगा। इसमें लगभग 600 टन शहर से रोज निकलने वाला नया कचरा और 600 टन पुराना जमा कचरा शामिल होगा। इससे एक तरफ रोजाना निकलने वाले कचरे का प्रबंधन होगा, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ को भी धीरे-धीरे खत्म किया जा सकेगा।

मशीन लगाने के लिए शुरू हुई तैयारी-

मशीन की स्थापना के लिए केदारपुर लैंडफिल साइट पर टीनशेड और प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है। इसके लिए नगर निगम ने शॉर्ट टेंडर जारी किया है। सितंबर में टेंडर खुलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

कचरे से जैविक खाद और रिसाइक्लिंग सामग्री बनेगी-

नई व्यवस्था में कचरे के निस्तारण के साथ उससे आय अर्जित करने का मॉडल भी तैयार किया गया है। सूखे कचरे को अलग करके रिसाइक्लिंग के लिए फैक्ट्रियों को बेचा जाएगा, जबकि गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस खाद का इस्तेमाल पार्कों, नर्सरियों और किसानों के लिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया से होने वाली आय ठेकेदार को मिलने की योजना है।

नगर निगम को बिजली खर्च में भी होगी बचत-

नई व्यवस्था से नगर निगम को आर्थिक लाभ मिलने की भी उम्मीद है। अभी तक कचरा प्लांट का बिजली बिल नगर निगम उठाता था, जिस पर हर साल करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते थे। नए टेंडर की शर्तों के मुताबिक, बिजली कनेक्शन लेने और उसका पूरा बिल चुकाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। इससे नगर निगम के खर्च में कमी आने की उम्मीद है।

पहले 33 करोड़ खर्च हुए, फिर भी नहीं मिली सफलता-

पुराने कचरे के निस्तारण के लिए पहले करीब 33 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। हालांकि नगर निगम और पुराने ठेकेदार के बीच विवाद के कारण अपेक्षित काम नहीं हो सका। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद करीब 6 लाख टन कचरा ही हटाया जा सका। अब नए और पुराने दोनों तरह के कचरे के निस्तारण का टेंडर करीब 4.5 करोड़ रुपये में दिया गया है। नगर निगम का दावा है कि इससे पहले की तुलना में काफी बचत होगी।

कांग्रेस पार्षद ने पहल का किया स्वागत-

कांग्रेस पार्षद सोनू कुशवाह ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कचरा निस्तारण की दिशा में गंभीर और ठोस कदम उठाए गए हैं। उनका मानना है कि परियोजना से शहर को बड़ी राहत मिल सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया राहत भरा कदम-

इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विश्वजीत रतोनिया ने भी नई व्यवस्था का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कचरे के पहाड़ खत्म होने से आसपास रहने वाले लोगों को गंदगी और दुर्गंध से राहत मिलेगी। इसके साथ ही शहर के पर्यावरण में भी सुधार आने की उम्मीद है

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