Supreme Court: बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों की विस्तृत जांच जरूरी होती है, इसलिए प्रभावित लोगों को अपने-अपने संबंधित हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। अदालत के इस फैसले को उन लोगों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्हें उम्मीद थी कि शीर्ष अदालत स्वयं इन मामलों में हस्तक्षेप करेगी।
हाईकोर्ट में जाने की दी सलाह
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। कहीं अतिक्रमण का मामला है, कहीं नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर विवाद है, तो कहीं अन्य कानूनी पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसे तथ्यात्मक विवादों की जांच और साक्ष्यों का परीक्षण हाईकोर्ट बेहतर तरीके से कर सकते हैं। इसलिए याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट में राहत मांगने की सलाह दी गई।
Supreme Court: कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी रही कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपी होने या अपराधी मान लेने के आधार पर उसका घर या दुकान नहीं तोड़ा जा सकता। अदालत ने बुलडोजर कार्रवाई के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। इसके बावजूद विभिन्न राज्यों से बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए बुलडोजर चलाने की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। इन्हीं आरोपों के आधार पर कई अवमानना याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं।
CJI सूर्य कांत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2024 का फैसला सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों को छोड़कर अन्य मामलों पर लागू होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बुलडोजर कार्रवाई को स्वतः अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यदि किसी मामले में नियमों का पालन हुआ है या परिस्थितियां अलग हैं, तो उसकी जांच तथ्यों के आधार पर ही होगी।
Supreme Court: 2024 के फैसले में क्या थे दिशा-निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2024 के फैसले में कहा था कि बुलडोजर कार्रवाई किसी को दंडित करने का माध्यम नहीं बन सकती। अदालत ने निर्देश दिया था कि किसी भी निर्माण को तोड़ने से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस दिया जाए, संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर मिले, पूरी कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए और वीडियोग्राफी कराई जाए। साथ ही, यदि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई और पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया था। इसी फैसले ने देशभर में बुलडोजर कार्रवाई और कानून के शासन को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया।
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