Ayodhya: उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मौलाना जरजिस अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम और पांच वक्त का नमाजी बताए जाने वाले बयान पर अयोध्या के संत समाज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य और संत धर्मदास महाराज ने इस बयान को तथ्यहीन और समाज में विवाद पैदा करने वाला बताया। दोनों संतों ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सनातन परंपरा के आराध्य हैं और उनके बारे में बिना प्रमाण इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
परमहंस आचार्य ने बयान को बताया तथ्यहीन
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्तम और साक्षात परमात्मा हैं। उन्होंने मौलाना जरजिस अंसारी के बयान को तथ्यहीन, साक्ष्यहीन और समाज में अशांति फैलाने वाला बताया। उनका कहना था कि इस तरह के बयान भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न आस्थाओं वाले देश में धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी धर्म या परंपरा पर विवादित टिप्पणी से बचना चाहिए।
Ayodhya: सरकार से कार्रवाई की मांग
परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री से मौलाना जरजिस अंसारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि समाज में शांति और सद्भाव बना रहे। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर उठते विवादों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी से बयान दिए जाने चाहिए।
संत धर्मदास बोले- सनातन संस्कृति को सीमित नहीं किया जा सकता
अयोध्या के संत धर्मदास महाराज ने भी मौलाना के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके ज्ञान की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति अत्यंत प्राचीन है और भगवान श्रीकृष्ण को किसी एक विचारधारा या धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सदियों से संतों, ऋषियों और भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की है और उनके जीवन पर अनेक ग्रंथ लिखे गए हैं। ऐसे विषयों पर बिना पर्याप्त जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है।
Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे पर भी रखी अपनी बात
संत धर्मदास महाराज ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी आस्था और समर्पण की भावना से दान करते हैं, न कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से। उन्होंने कहा कि मंदिर में दिया गया छोटा से छोटा दान भी श्रद्धा का प्रतीक होता है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
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