Kremlin Statement: रूस ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को लेकर तुर्की की ओर से दिए गए मध्यस्थता प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में यूक्रेन के साथ नई शांति वार्ता शुरू होने की कोई तत्काल संभावना नजर नहीं आ रही है। हालांकि, रूस ने यह भी कहा कि वह भविष्य में बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं मानता और अनुकूल परिस्थितियां बनने पर इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार रहेगा।
क्रेमलिन ने बातचीत की संभावना से किया इनकार
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस तुर्की की शांति स्थापित करने की इच्छा और प्रयासों की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि तुर्की लगातार रूस और यूक्रेन के बीच समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वर्तमान समय में वार्ता दोबारा शुरू होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। इसलिए फिलहाल किसी नई बातचीत की उम्मीद नहीं की जा सकती।
Kremlin Statement: तुर्की की मध्यस्थता की कोशिश जारी
तुर्की लंबे समय से रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है। वर्ष 2025 में इस्तांबुल में शांति वार्ता के तीन दौर आयोजित किए गए थे। इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में दो दौर और जिनेवा में एक दौर की बातचीत भी हुई। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के बीच स्थायी समाधान नहीं निकल सका और बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
युद्ध के बीच जारी हैं हमले
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध में दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के शहरों, ऊर्जा ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। समुद्री क्षेत्रों में भी तनाव बना हुआ है। इसी कारण युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
Kremlin Statement: स्थायी समझौते पर अड़ा है रूस
क्रेमलिन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यूक्रेन की सरकार में हुए नेतृत्व परिवर्तन पर नजर बनाए हुए है। हालांकि, रूस का मानना है कि नए प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री की नियुक्ति से स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, जब तक कीव शांति समझौते की दिशा में ठोस राजनीतिक निर्णय लेने के लिए तैयार नहीं होता। वहीं, यूक्रेन जहां तत्काल युद्धविराम की मांग करता रहा है, रूस का कहना है कि वह केवल स्थायी और दीर्घकालिक शांति समझौता चाहता है, ऐसा युद्धविराम नहीं जिससे यूक्रेन को सैन्य रूप से फिर से मजबूत होने का अवसर मिल जाए।
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