Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में अपना दाहिना पैर गंवाने वाले तमिलनाडु के एक राजमिस्त्री को बड़ी राहत देते हुए उसके मुआवजे की राशि बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करते समय केवल शारीरिक विकलांगता के प्रतिशत को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि चोट के कारण व्यक्ति की आजीविका कमाने की क्षमता कितनी प्रभावित हुई है।
कार्यात्मक विकलांगता को दिया महत्व
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की स्थायी शारीरिक विकलांगता भले ही 70 प्रतिशत आंकी गई हो, लेकिन एक राजमिस्त्री के रूप में उसकी कार्य करने की क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसलिए उसकी कार्यात्मक विकलांगता को शत-प्रतिशत माना जाना चाहिए।
Supreme Court: दुर्घटना में गंवाना पड़ा था पैर
मामला 18 अप्रैल 2017 का है, जब तमिलनाडु के नमक्कल-सेलम राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक लॉरी ने साइकिल सवार व्यक्ति को पीछे से टक्कर मार दी थी। दुर्घटना में उसके सिर, जबड़े, आंख और दाहिने पैर में गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसका दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। उस समय पीड़ित की उम्र करीब 30 वर्ष थी और वह राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता था।
मुआवजे की राशि में लगातार हुआ इजाफा
पीड़ित ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। वर्ष 2019 में अधिकरण ने उसकी मासिक आय 6,000 रुपये मानते हुए 10.84 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। बाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने मासिक आय 12,000 रुपये मानकर तथा भविष्य की आय की संभावनाओं को जोड़ते हुए मुआवजा बढ़ाकर 29.01 लाख रुपये कर दिया।
Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने सुधारी गणना की त्रुटियां
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उच्च न्यायालय की गणना में कुछ त्रुटियां रह गई थीं। अदालत ने कहा कि भविष्य की आय का आकलन बढ़ी हुई आय के आधार पर किया जाना चाहिए था। साथ ही कुछ मदों में स्वीकृत राशि अंतिम गणना में शामिल नहीं की गई थी। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कुल मुआवजा बढ़ाकर 40.29 लाख रुपये कर दिया। न्यायालय ने कहा कि स्थायी विकलांगता के मामलों में आर्थिक नुकसान का आकलन वास्तविक कार्य क्षमता के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल शारीरिक विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर।
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