एमपी स्वास्थ्य विभाग, इलाज नहीं, अब डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल

मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले ही कई गंभीर और शर्मनाक मामलों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। कहीं अस्पतालों में चूहों ने नवजात बच्चों की जान ले ली, कहीं मासूमों को HIV संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, तो कहीं जहरीली दवाओं से बच्चों की मौत हो गई। जब डॉक्टर सिर्फ कागजों और ऐप में मौजूद हों और मरीज हकीकत में इलाज के लिए भटकता रहे, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि इलाज के नाम पर बेहद बेरहम धोखा है।