एमपी स्वास्थ्य विभाग, इलाज नहीं, अब डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल

मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले ही कई गंभीर और शर्मनाक मामलों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। कहीं अस्पतालों में चूहों ने नवजात बच्चों की जान ले ली, कहीं मासूमों को HIV संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, तो कहीं जहरीली दवाओं से बच्चों की मौत हो गई। जब डॉक्टर सिर्फ कागजों और ऐप में मौजूद हों और मरीज हकीकत में इलाज के लिए भटकता रहे, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि इलाज के नाम पर बेहद बेरहम धोखा है।

राजस्थान में लापरवाही का दर्दनाक मामला, ऑक्सीजन खत्म होने से नवजात की मौत

RAJASHTHAN NEWS

राजस्थान के भरतपुर जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। भरतपुर से जयपुर के सरकारी अस्पताल ले जाए जा रहे एक दिन के नवजात शिशु की रास्ते में ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन खत्म होने के बाद एम्बुलेंस ड्राइवर उन्हें बस्सी के सरकारी अस्पताल में छोड़कर वहां से चला गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद नवजात को मृत घोषित कर दिया।