Trump White House entry dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रमुख मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोकने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। CNN, MS NOW और POLITICO ने संयुक्त रूप से ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को वाशिंगटन डीसी की अदालत में चुनौती दी है। मीडिया संस्थानों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह फैसला अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने अदालत से ट्रंप के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की सुनवाई बुधवार को होगी।
Trump White House entry dispute: ट्रंप ने पत्रकारों की एंट्री क्यों रोकी-
ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए CNN, MS NOW और POLITICO के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोकने का ऐलान किया था। इसके बाद शनिवार को इन संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रवेश संबंधी प्रमाण-पत्र निष्क्रिय कर दिए गए। ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों पर उनके खिलाफ लगातार फर्जी और झूठी खबरें चलाने का आरोप लगाया। सोमवार को उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उनका निशाना स्वतंत्र प्रेस नहीं, बल्कि फेक न्यूज है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया।
Trump White House entry dispute: क्या कहता है अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन-
अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन 15 दिसंबर 1791 को बिल ऑफ राइट्स के हिस्से के रूप में लागू हुआ था। इसमें सरकार को धर्म, अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करने वाले कानून बनाने से रोका गया है। पहले संशोधन के तहत कांग्रेस ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती, जो अभिव्यक्ति या प्रेस की स्वतंत्रता को कम करे। इसी वजह से अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण हासिल है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पत्रकारों को हर सरकारी परिसर में बिना किसी नियम के प्रवेश का अधिकार मिल जाता है। यही अंतर मौजूदा मुकदमे में महत्वपूर्ण है।
क्या पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की गारंटी है-
मामला इतना सीधा नहीं है। अमेरिकी अदालतें पहले भी कह चुकी हैं कि पहला संशोधन प्रेस को उन जगहों पर विशेष प्रवेश का अधिकार नहीं देता, जहां आम जनता को प्रवेश नहीं मिलता। इसलिए CNN और दूसरे मीडिया संस्थानों का मुख्य सवाल केवल व्हाइट हाउस में प्रवेश का नहीं है। उनका तर्क है कि क्या उन्हें उनकी खबरों और रिपोर्टिंग के कारण निशाना बनाया गया है। यदि अदालत यह मानती है कि सरकार ने किसी खास दृष्टिकोण या आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के कारण मीडिया संस्थानों के साथ अलग व्यवहार किया, तो पहला संशोधन इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है।
CNN, MS NOW और POLITICO कोर्ट क्यों पहुंचे-
तीनों मीडिया संस्थानों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का कदम उनकी प्रेस स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। उन्होंने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि उनके पत्रकारों को व्हाइट हाउस की कवरेज से बाहर रखने वाले फैसले पर रोक लगाई जा सके। मीडिया संस्थानों का तर्क है कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि कोई मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के बारे में क्या रिपोर्ट करेगा। पत्रकारों के लिए राष्ट्रपति से सीधे सवाल पूछना, अधिकारियों से बातचीत करना और अचानक सामने आई घटनाओं पर प्रतिक्रिया लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप और मीडिया के बीच पहले भी हुआ है टकराव-
यह ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच पहला कानूनी टकराव नहीं है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके प्रशासन ने CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा का व्हाइट हाउस प्रेस पास वापस लेने की कोशिश की थी। अदालत ने उस मामले में एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। मौजूदा मुकदमे की सुनवाई करने वाले जज टिमोथी केली ही उस पुराने मामले में भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दे चुके हैं। केली की नियुक्ति ट्रंप ने 2017 में की थी। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी प्रशासन और मीडिया के बीच कई टकराव हुए हैं। इनमें एसोसिएटेड प्रेस की व्हाइट हाउस प्रेस व्यवस्था और पेंटागन में पत्रकारों की एंट्री से जुड़े विवाद शामिल हैं।
इस बार मामला ज्यादा बड़ा क्यों है-
इस बार CNN, MS NOW और POLITICO तीन बड़े मीडिया संस्थान एक साथ अदालत पहुंचे हैं। इसके अलावा दूसरे बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्कों ने भी व्हाइट हाउस के प्रेस पूल में CNN की जगह लेने से इनकार किया है। व्हाइट हाउस का प्रेस पूल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के साथ हर जगह कैमरा और पूरी टीम नहीं ले जा सकता। पूल व्यवस्था के तहत एक संस्थान राष्ट्रपति की गतिविधियों की तस्वीर और वीडियो उपलब्ध कराता है, जिसका इस्तेमाल दूसरे मीडिया संस्थान भी करते हैं।
क्या ट्रंप का फैसला पलटेगा-
इसका अभी निश्चित जवाब देना जल्दबाजी होगा। अदालत ने मामले पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। मौजूदा मामले में अदालत को संविधान के पहले संशोधन, प्रेस की एंट्री और राष्ट्रपति के प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन पर विचार करना होगा। यानी इस मुकदमे का मुख्य सवाल सिर्फ यह नहीं है कि CNN या दूसरे मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में प्रवेश मिलेगा या नहीं। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति किसी मीडिया संस्थान की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग से नाराज होकर उसकी सरकारी पहुंच सीमित कर सकते हैं।
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