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BJP का बड़ा प्लान, लखनऊ-मथुरा से वाराणसी तक बैठकों का महामंथन

UP News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और चुनावी तैयारियों को लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह को बेहद अहम बना दिया है। 1 और 2 अक्टूबर को लखनऊ में संगठनात्मक बैठकों के बाद 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में दो दिवसीय चिंतन बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद 7 अक्टूबर को वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ कार्यक्रम होना है।
इस पूरे कार्यक्रम को सिर्फ बैठकों की एक सामान्य कड़ी के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसकी टाइमलाइन और तीन शहरों का चयन पार्टी की चुनावी तैयारी के अलग-अलग पहलुओं की ओर संकेत करता है। लखनऊ संगठनात्मक केंद्र है, मथुरा को चिंतन बैठक के लिए चुना गया है और वाराणसी में अगला बड़ा कार्यक्रम रखा गया है। यानी अक्टूबर की शुरुआत में संगठन, विचार और क्षेत्रीय संपर्क तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश नजर आती है।

 

लखनऊ में संगठन पर फोकस, मथुरा में रणनीति पर मंथन
1 और 2 अक्टूबर को प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अपने सह-प्रभारियों के साथ लखनऊ में रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान संगठन के अलग अलग स्तर पर बैठकें होंगी, जिनमें चुनावी रणनीति और जमीनी तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। इसके तुरंत बाद 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत वरिष्ठ नेताओं की दो दिवसीय चिंतन बैठक प्रस्तावित है।
यहीं इस पूरे प्लान का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है सिर्फ दिल्ली या लखनऊ स्तर की बैठक के बजाय संगठनात्मक चर्चा को प्रदेश के दूसरे बड़े राजनीतिक-सांस्कृतिक केंद्र तक ले जाना। मथुरा बैठक में चुनावी रणनीति और पार्टी के वैचारिक एजेंडे पर मंथन की बात सामने आई है।
UP News:योगी की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है?
अक्टूबर की इस बैठक में योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी दो प्रमुख पड़ावों पर दर्ज है। मथुरा की चिंतन बैठक में मुख्यमंत्री शामिल होंगे और 7 अक्टूबर को वाराणसी के कार्यक्रम में भी नितिन नबीन के साथ उनकी मौजूदगी प्रस्तावित है।
इससे एक स्पष्ट संगठनात्मक तस्वीर सामने आती है। एक तरफ पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व है, दूसरी तरफ राज्य सरकार का नेतृत्व, और इनके बीच प्रदेश संगठन की भूमिका है। चुनावी तैयारी के लिहाज से यह सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को केंद्र में रखने वाला मॉडल है। हालांकि इन बैठकों में अंतिम रूप से किन फैसलों पर मुहर लगेगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
सबसे दिलचस्प कड़ी: तीन शहर, तीन राजनीतिक संदेश
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात इसकी भौगोलिक टाइमलाइन है। लखनऊ → मथुरा → वाराणसी का क्रम अपने आप में चर्चा का विषय है।
लखनऊ में संगठनात्मक मशीनरी और जमीनी तैयारियों पर जोर है। मथुरा में चिंतन और वैचारिक एजेंडे पर चर्चा होनी है। इसके बाद वाराणसी का कार्यक्रम पूर्वी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण हिस्से और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़ता है। इसे मिलाकर देखें तो पार्टी की तैयारी में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और संगठनात्मक स्तरों को एक ही शुरुआती अक्टूबर विंडो में जोड़ने की कोशिश दिखती है।
UP News:संगठन में बदलाव के तुरंत बाद बैठकों का दौर
एक और बात इस पूरी तस्वीर को अहम बनाती है। सितंबर के अंत में बीजेपी ने संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव किए हैं और धर्मपाल को दोबारा उत्तर प्रदेश का प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाया गया है। साथ ही ब्रज क्षेत्र के लिए भी अलग संगठनात्मक जिम्मेदारी तय की गई है।
यानी अक्टूबर की बैठकों से पहले संगठन का ढांचा भी नए सिरे से जिम्मेदारियों के साथ सेट किया जा रहा है। ऐसे में मथुरा में होने वाली बैठक को सिर्फ चुनावी भाषणों की बैठक के बजाय संगठन के नए संयोजन के साथ रणनीति तय करने वाली प्रक्रिया के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।
23 अक्टूबर का MLC चुनाव भी बनेगा शुरुआती पड़ाव
2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। बीजेपी ने इन सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची पूरी कर ली है।
यह चुनाव विधानसभा चुनाव जैसा व्यापक जनादेश नहीं देता, क्योंकि इसमें मतदाता समूह अलग होता है। फिर भी राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से यह आने वाले महीनों की तैयारियों के लिए एक नजदीकी पड़ाव है। खासकर लखनऊ, मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर-फैजाबाद जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता का यह एक अलग स्तर पर परीक्षण होगा।
UP News:2027 से पहले असली फोकस क्या होगा?
अक्टूबर की बैठकों से अभी कोई अंतिम चुनावी फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है। लेकिन उपलब्ध जानकारी से तीन प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं संगठन को चुनावी मोड में मजबूत करना, राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय बढ़ाना और अलग-अलग क्षेत्रीय केंद्रों से चुनावी तैयारी को गति देना।
सबसे अहम बात यह है कि 2027 की तैयारी अब केवल चुनाव की तारीखों का इंतजार करने वाली प्रक्रिया नहीं रह गई है। सितंबर के संगठनात्मक बदलाव, अक्टूबर के लगातार कार्यक्रम और उसी महीने होने वाले MLC चुनाव को एक साथ देखें तो बीजेपी का जोर शुरुआती चरण में ही संगठनात्मक नेटवर्क को सक्रिय रखने पर दिखाई देता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि 3-4 अक्टूबर की मथुरा चिंतन बैठक और 7 अक्टूबर के वाराणसी कार्यक्रम के बाद यूपी चुनाव को लेकर कौन से नए फैसले सामने आते हैं और संगठन स्तर पर उनका असर किस तरह दिखाई देता है।

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