समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने सपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए हमला तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव की यात्रा पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा पिछड़े, दलित और कमजोर वर्ग के नाम पर जातीय राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। अनिल राजभर ने कहा कि सपा एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता उसके बहकावे में नहीं आने वाली।
UP News: ‘पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी’
अनिल राजभर ने पीडीए रथ यात्रा को लेकर कहा कि यह यात्रा पूरी तरह फर्जी है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग सपा की राजनीति से परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान समाजवादी पार्टी को गरीबों की चिंता नहीं थी और अब चुनाव से पहले पिछड़े और दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। यह आरोप भाजपा नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी इस यात्रा को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के अधिकार तथा सामाजिक न्याय से जोड़कर पेश कर रही है।
पीडीए की परिभाषा को लेकर भी साधा निशाना
अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके लिए पीडीए का मतलब क्या है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के नेता अलग-अलग मौकों पर इसकी अलग-अलग व्याख्या करते हैं। सपा की ओर से पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया जाता है। अखिलेश यादव की मौजूदा यात्रा भी इसी सामाजिक समीकरण को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाई जा रही है। रायबरेली से यात्रा की शुरुआत के पीछे भी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को अहम माना जा रहा है। यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के संगठन और पीडीए संदेश को जमीन तक पहुंचाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
UP News: चुनाव आयोग के मुद्दे पर क्या बोले अनिल राजभर?
नए वोटर फॉर्म में निगरानी से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़े सवाल पर भी अनिल राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ी है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग नियमों और परंपराओं के तहत आपसी विचार-विमर्श के बाद फैसले करता है और अलग-अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।
दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश पर साधा निशाना
पीडीए रथ यात्रा को लेकर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे का जिक्र करते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश को अपने पार्टी नेताओं के घर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल रहे स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से उन्होंने अब तक मुलाकात क्यों नहीं की। दिनेश प्रताप सिंह ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि शिष्टाचार और मानवीय संवेदना का विषय बताया। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री को दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी।

UP News: ‘पीडीए’ को बताया ‘परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस’
दिनेश प्रताप सिंह ने पीडीए को लेकर भी सपा पर हमला किया। उन्होंने इसे ‘परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस’ बताते हुए दावा किया कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज सपा के साथ नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछड़ा समाज एनडीए के साथ खड़ा है। ये राजनीतिक दावे भाजपा नेता की ओर से किए गए हैं और इन्हें पार्टी के रुख के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
रायबरेली में क्यों बढ़ी सियासी हलचल?
अखिलेश यादव ने अपनी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत रायबरेली से की है। यह इलाका कांग्रेस के मजबूत राजनीतिक आधार वाले क्षेत्रों में गिना जाता है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां सपा की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। यात्रा के दौरान अखिलेश यादव सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर भी जाने वाले हैं। इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं और छात्र संगठन से जुड़े लोगों से मुलाकात का कार्यक्रम भी है। यात्रा शुरू होने से पहले रायबरेली में पोस्टर वार भी देखने को मिला। भाजपा समर्थक पोस्टरों में अखिलेश यादव और सपा पर निशाना साधा गया, जबकि सपा की ओर से पीडीए और सामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर अपना संदेश आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब आगे क्या?
पीडीए रथ यात्रा के जरिए अखिलेश यादव पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा नेता लगातार इस अभियान की मंशा और सपा की पिछली राजनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पीडीए यात्रा सिर्फ सपा का जनसंपर्क अभियान नहीं रहेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर चल रही बयानबाजी का भी बड़ा मंच बन सकती है। फिलहाल रायबरेली से शुरू हुई इस यात्रा ने यूपी की चुनावी राजनीति में बहस को जरूर तेज कर दिया है।
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