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वृंदावन मारपीट केस में बड़ा ट्विस्ट: ‘जानलेवा हमले’ की धारा हटी, सभी आरोपित जमानत पर बाहर!

Vrindavan assault case: मथुरा जिले के वृंदावन में कथावाचक पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा लगाई गई ‘जानलेवा हमले’ की धारा को खारिज करते हुए सभी छह आरोपितों को जमानत दे दी है। इनमें दिल्ली से आई महिलाएं भी शामिल हैं।

कोर्ट ने पुलिस की धाराओं को माना कमजोर

मामला कथावाचक मुदुलकांत शास्त्री के साथ हुई मारपीट से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में श्रद्धालुओं पर गंभीर धाराएं लगाई थीं, जिनमें जानलेवा हमले का आरोप भी शामिल था। हालांकि, अदालत ने पुलिस की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि मामला प्रथम दृष्टया मारपीट और दुर्घटना से जुड़ा प्रतीत होता है, न कि जानलेवा हमले से।

Vrindavan assault case: सड़क हादसे से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत एक मामूली सड़क दुर्घटना से हुई थी। कथावाचक की कार और दिल्ली से आए श्रद्धालुओं की कार के बीच टक्कर हो गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो बाद में मारपीट में बदल गई। कथावाचक ने इसे जानलेवा हमला बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया।

महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली से आई महिलाओं ने घटना के बाद पुलिस और कुछ संतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि थाने में उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई और उन्हें बच्चों सहित रातभर हवालात में रखा गया। महिलाओं का यह भी आरोप है कि उन्हें भोजन तक नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए हैं।

Vrindavan assault case: कथावाचक की तबीयत बिगड़ी

घटना के बाद कथावाचक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की थी, हालांकि बाद में उन्हें छुट्टी दे दी गई।

जांच जारी, बढ़ी सियासी और सामाजिक चर्चा

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। इस घटनाक्रम ने पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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