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परिसीमन की शर्त पर बवाल, महिला आरक्षण बना सत्ता और विपक्ष की टकराहट का केंद्र

महिला आरक्षण पर सियासी जंग तेज
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Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान अब और तेज हो गई है। संसद का हालिया सत्र बिना किसी ठोस नतीजे के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया, जिसके बाद राजनीति अब संसद से निकलकर राज्यों तक पहुंचती नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ “निंदा प्रस्ताव” पारित किया जाए। पार्टी का मानना है कि विपक्ष संसद चलने नहीं दे रहा है और महत्वपूर्ण विधेयकों को जानबूझकर रोक रहा है।

Women Reservation Bill:  महिला आरक्षण पर सियासी जंग तेज
महिला आरक्षण पर सियासी जंग तेज

संसद में क्या हुआ?

लोकसभा और राज्यसभा का सत्र शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव पारित नहीं हो सके।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, इस सत्र में कुल 31 बैठकें हुईं और करीब 151 घंटे 42 मिनट तक कार्यवाही चली। उत्पादकता 93% रही, लेकिन आखिरी दिनों में हंगामे के कारण महत्वपूर्ण बिल अटक गए।

विपक्ष का क्या कहना है?

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को जोड़ना राजनीतिक रणनीति है। उनका कहना है, “अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो उसे 2023 में पारित कानून को लागू करना चाहिए। परिसीमन को शर्त बनाना इस प्रक्रिया को टालने जैसा है।”विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी “शर्तों” के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बिना शर्त कानून लागू किया जाता है, तो विपक्ष पूरा समर्थन देने को तैयार है।

Women Reservation Bill: असली विवाद क्या है?

यह पूरा विवाद दो बड़े मुद्दों पर टिका है:

1. महिला आरक्षण कानून (2023)
इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया है।

2. परिसीमन (Delimitation)
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण। विपक्ष का डर है कि इससे कुछ राज्यों का राजनीतिक संतुलन बदल सकता है, खासकर दक्षिण भारत में।

बीजेपी की रणनीति

बीजेपी अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। राज्यों में विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, जबकि विपक्ष बाधा बन रहा है।

Women Reservation Bill: आगे क्या हो सकता है?

सरकार अगले सत्र में फिर से विधेयक लाने की कोशिश कर सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को जनहित और राजनीतिक संतुलन से जोड़कर बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकता है। राज्यों में प्रस्ताव पास होने से यह मुद्दा और गरमा सकता है।

महिला आरक्षण का मुद्दा देश में लंबे समय से लंबित रहा है, लेकिन अब यह सिर्फ एक सामाजिक सुधार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। संसद में गतिरोध के बाद अब इसकी गूंज राज्यों की विधानसभाओं तक पहुंच गई है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है।

Written by- Kanishka Ram

ये भी पढ़ें….महिला आरक्षण पर कांग्रेस का सीधा आरोप, महिलाओं के हक को राजनीतिक मुद्दा बना रही सरकार: प्रियंका गांधी

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