MDR क्या है, पेट्रोल पंपों को क्यों परेशानी? ₹2000 की लिमिट और ₹5 चार्ज का पूरा गणित

Upi Petrol Pump

Upi Petrol Pump: यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। ₹2000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होने जा रहा है। पेट्रोल पंप डीलरों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों में पेट्रोल पंप एसोसिएशनों ने … Read more

हिंदुत्व से जातीय समीकरण तक, यूपी में BJP की रणनीति क्यों बदल रही

Up Politics

Up Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी करीब छह महीने का समय है, लेकिन बीजेपी और RSS ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। लखनऊ से लेकर पश्चिमी यूपी, अवध और पूर्वांचल तक बैठकों का दौर चल रहा है। इन बैठकों में संगठन और सरकार के बीच तालमेल, बूथ स्तर की तैयारी, कार्यकर्ताओं … Read more

यूपी में इकरा बनाम इमरान, कहां जाएगा पश्चिम यूपी का मुसलमान?

 Iqra vs Imran Masood:

Iqra vs Imran Masood: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही नेताओं के बीच बयानबाजी भी बढ़ती जा रही है। पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन और कांग्रेस नेता इमरान मसूद के बीच जुबानी जंग ने सियासी चर्चा को और तेज कर दिया है। दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पश्चिमी यूपी की राजनीति में इस टकराव का क्या असर होगा?

Iqra vs Imran Masood: इकरा हसन के बयान पर इमरान मसूद का पलटवार-

कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने हाल ही में कहा था कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ही हरा सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस को लेकर कहा था कि पार्टी अपने दम पर बीजेपी को मात नहीं दे पाएगी। इकरा हसन के इस बयान पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने पलटवार किया। उन्होंने इकरा को 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे देखने की सलाह दी। मसूद ने कहा कि कांग्रेस के साथ रहने पर लोकसभा चुनाव में विपक्ष को 37 सीटें मिली थीं, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बिना सपा 112 सीटों पर ही रुक गई थी।

Iqra vs Imran Masood: 2017 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात-

इमरान मसूद ने एनडीटीवी से बातचीत में यूपी में सीट बंटवारे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 2017 के गठबंधन से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इससे पहले मसूद ने यूपी में सीट बंटवारे में हो रही देरी को लेकर सपा पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और राहुल गांधी के बिना बीजेपी को हराना संभव नहीं है। मसूद ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में माहौल बनाया है और गठबंधन में किसी को गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने अतीत से सबक लेने की बात भी कही।

इकरा ने फिर साधा कांग्रेस पर निशाना-

इमरान मसूद के बयान के बाद इकरा हसन ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को अखिलेश यादव ही हरा सकते हैं और कांग्रेस अपने दम पर बीजेपी को नहीं हरा पाएगी। इकरा और मसूद के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय हो रही है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। पश्चिमी यूपी की राजनीति में दोनों नेताओं का अपना प्रभाव माना जाता है, इसलिए उनके बयानों पर सियासी नजरें टिकी हुई हैं।

पश्चिमी यूपी में 71 विधानसभा सीटें-

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 71 सीटें हैं। मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली और बुलंदशहर समेत कई जिलों में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या है। ऐसे में इकरा हसन और इमरान मसूद के बीच चल रही बयानबाजी को मुस्लिम वोटों की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव में मतदाताओं का रुख कई स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर निर्भर कर सकता है। ऐसे में अभी यह कहना मुश्किल है कि इस सियासी खींचतान का चुनावी असर किस तरह सामने आएगा।

मिशन 2027 में जुटी बीजेपी-

उधर, बीजेपी ने भी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी यूपी के दौरे पर हैं और मेरठ से लेकर सहारनपुर तक पार्टी संगठन को मजबूत करने की कवायद चल रही है। मेरठ, बुलंदशहर, शामली और गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी की 71 विधानसभा सीटों पर बीजेपी अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत रहा था। अब 2027 के चुनाव को देखते हुए बीजेपी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है। ऐसे में एक तरफ सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर बयानबाजी चल रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी पश्चिमी यूपी में अपने संगठन और चुनावी अभियान को मजबूत करने में जुटी है।

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बिहार के विक्रमशिला सेतु बंद होने की पूरी कहानी, वजह से लेकर विकल्प तक

Vikramshila bridge

Vikramshila bridge: बिहार के भागलपुर में गंगा पर बने विक्रमशिला सेतु से सफर करने वाले लोगों के लिए अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुल पर करीब तीन महीने तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। इसकी वजह पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों का स्थायी पुनर्स्थापन और चार कमजोर स्पैन पर मजबूत ट्रस … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खींच दी लंबी लकीर, मिटा नहीं पाएंगे अखिलेश यादव

UP News: राजनीतिक पार्टियों ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। इन्हीं तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव एक नई रणनीति पर काम करते दिखाई देते हैं। उनकी यह रणनीति अक्सर उनके व्यवहार और काम में भी दिखाई देती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अखिलेश को … Read more

Arrest Rules: गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Arrest Rules:

Arrest Rules: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपी को गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताए बिना की गई गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। ऐसा न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने फैसला सुनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत मिले अधिकारों को स्पष्ट किया।

Arrest Rules: PMLA-UAPA के तहत भी गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी-

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि देश की कोई भी जांच एजेंसी हो, आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले उसे गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना होगा। यह नियम सभी मामलों में लागू होगा, चाहे गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) या गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ही क्यों न हो। अनुच्छेद 22(1) के तहत लिखित में कारण बताए बिना की गई गिरफ्तारी को गैर-कानूनी माना जाएगा। वहीं, अगर किसी आरोपी की गिरफ्तारी रद्द की जा चुकी है और उसे दोबारा गिरफ्तार करना है, तो मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी होगा।

Arrest Rules: BNS/BNSS के मामलों में भी लागू होगा नियम-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी गिरफ्तारी तब तक कानूनी नहीं मानी जाएगी, जब तक आरोपी को गिरफ्तारी का कारण लिखित में नहीं बताया जाता। यानी अनुच्छेद 22 के नियमों का पालन BNS/BNSS के तहत दर्ज मामलों में भी करना होगा।कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार ऐसी भाषा में होने चाहिए, जिसे आरोपी आसानी से समझ सके। लिखित में बताए गए कारणों की एक कॉपी गिरफ्तार किए जा रहे व्यक्ति को भी देनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 22 और अनुच्छेद 22(1) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पंजाब पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच के आदेश-

यह मामला शिरोमणि अकाली दल के मुल्लांपुर डाखा प्रभारी जसकरणजीत सिंह की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी करार दिया है। जसकरणजीत सिंह पर नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप थे, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताए बिना गिरफ्तार किया गया था। जसकरणजीत सिंह ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, जज ने गिरफ्तारी को सही ठहराया। इसके बाद उन्होंने इस फैसले के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद फैसला दिया गया।

दूसरे पुलिस अधिकारी को सौंपी जाएगी जांच-

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की जांच और कार्रवाई किसी दूसरे पुलिस अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही, जिस पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तारी की, उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच में पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसकी सर्विस बुक में एंट्री की जाए और विभागीय कार्रवाई की जाए। फैसले की एक कॉपी देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस विभाग के प्रमुखों को भेजने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि अनुच्छेद 22 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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UN General Assembly: 81वें सत्र में एक मंच पर जुटेंगे वर्ल्ड लीडर्स, जंग से AI तक इन मुद्दों पर होगी चर्चा

UN General Assembly:

UN General Assembly: दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशंस हेडक्वॉर्टर में 81वीं यूएन जनरल असेंबली के हाई-लेवल मीटिंग्स के लिए एकसाथ आ रहे हैं। इस दौरान जंग, जलवायु परिवर्तन, विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भविष्य जैसे मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होने की उम्मीद है।

UN General Assembly: क्या है जनरल असेंबली का शेड्यूल-

जनरल डिबेट मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को शुरू होगी और 26 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद 28 सितंबर को दोबारा डिबेट शुरू होगी। यूनाइटेड नेशंस को उम्मीद है कि करीब 130 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा सभी 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।

UN General Assembly: जंग और ग्लोबल डिप्लोमेसी पर होगी चर्चा-

बांग्लादेश के खलीलुर रहमान 81वें सत्र की अध्यक्षता कर रहे हैं। इस सत्र की थीम है, ‘भरोसा बहाल करना, बदलाव को संभालना: एक ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।’ भारत को विदेश मंत्री एस जयशंकर रिप्रेजेंट कर रहे हैं। उन्होंने रीजनल सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर इंटरनेशनल काउंटरपार्ट्स के साथ कई मीटिंग्स की हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को असेंबली को संबोधित करेंगे, जबकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी इसमें शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में से एक हैं। इस दौरान यूक्रेन, मिडिल ईस्ट, एनर्जी और इंटरनेशनल सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

क्लाइमेट, डेवलपमेंट और हेल्थ पर भी फोकस-

जनरल डिबेट के अलावा यूनाइटेड नेशंस के कार्यक्रम में सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, क्लाइमेट एक्शन, समुद्र के जलस्तर में इजाफा, महामारी की तैयारी, नस्लवाद और परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा शामिल है। 23 सितंबर को होने वाला जलवायु कार्यक्रम रिन्यूेबल एनर्जी, क्लाइमेट फाइनेंस और कमजोर समुदायों के लिए सपोर्ट पर फोकस्ड होगा। नेता 24 सितंबर को समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर चर्चा करेंगे। इसके बाद 25 सितंबर को भविष्य की महामारियों के लिए वैश्विक तैयारी को मजबूत करने पर मीटिंग होगी। इस हफ्ते नस्लीय समानता पर भी बात होगी और डरबन डेक्लेरेशन की 25वीं सालगिरह मनाई जाएगी। कार्यक्रम का समापन परमाणु हथियारों को खत्म करने पर चर्चा के साथ होगा।

क्या चुनौतियों से निपट पाएगी दुनिया-

यह मीटिंग बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और एक साथ चल रहे ग्लोबल क्राइसिस के बीच हो रही है। यूएन सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने संगठन के सामूहिक कार्रवाई के मूल सिद्धांत पर जोर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश उन चुनौतियों पर कूटनीतिक बातचीत को प्रैक्टिकल कोऑपरेशन में बदल सकते हैं, जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे हैं।

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‘मुस्लिम CM का ऐलान करो, सपा साफ हो जाएगी!’ रशीदी के बयान से यूपी में सियासी हलचल

Uttar Pradesh Elections 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजेपी को लेकर कई अहम टिप्पणियां की हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में … Read more

UP की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर राज्यसभा चुनाव का ऐलान, 16 अक्टूबर को वोटिंग

Rajya Sabha Elections 2026:

Rajya Sabha Elections 2026: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने राज्यसभा की 11 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव कराने का ऐलान किया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होगा। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी होगी, जबकि 16 अक्टूबर को मतदान और उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

Rajya Sabha Elections 2026: 16 अक्टूबर को होगी वोटिंग और काउंटिंग-

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

Rajya Sabha Elections 2026: UP की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव-

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव कराया जा रहा है। इन सीटों पर अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रोफेसर राम गोपाल यादव, रामजी, बीएल वर्मा, सीमा, दिनेश शर्मा और हरदीप सिंह पुरी के कार्यकाल का उल्लेख चुनाव कार्यक्रम के संदर्भ में किया गया है।

उत्तराखंड की एक सीट पर भी चुनाव-

उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर भी चुनाव होगा। इस सीट पर नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए सदस्य का चुनाव किया जाएगा। राज्यसभा के चुनाव में संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।

29 सितंबर से शुरू होंगे नामांकन-

ECI के कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और इसी के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। 16 अक्टूबर को मतदान के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर भी चुनाव-

चुनाव आयोग ने बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए भी चुनाव कार्यक्रम जारी किया है। इनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।

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