RSS: लगातार पिछले एक दशक से लगातार देश में धर्म के नाम पर नफरत फैलाई जा रही है, ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके बहुत सारे उदाहरण हमारे सामने हैं- जैसे बार-बार देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के संसद में नेता विपक्ष राहुल गांधी हैं; कांग्रेस की भारतीय जनता पार्टी से विचार धारा की लड़ाई है। मौका मिलते ही हर मंच से उनका यह रटारटाया तकिया कलाम है। ठीक है आप कहें, पर इस विचारधारा को देश में कौन समझ रहे है ? देश के आम नागरिक की रोजी-रोटी की लड़ाई है, उसे किसी विचारधारा में पड़ने की जरूरत नहीं होती।
इसलिए बार-बार आम नागरिक को बताना कि हमारी विचारधारा ही श्रेष्ठ है; यह सरासर गलत है। अच्छी बात या विचारधारा होगी, तों अवश्य ही आपका अनुसरण करेगा। मात्र बातों से नहीं, बल्कि अपने तरीके से जनहित में किए गये कार्य ही स्वतः जनता के मन में उतरते हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर अरएसएस पर प्रहार करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए, आरएसएस एक स्वयं सेवी संस्था है, वह भी अपने जन्म से देश की समृद्धि के लिए कार्यक्रम बना रही है, और उन्हें भी धरातल पर उतार रही है। देश की आम जनता उनके कार्यों को देखकर उनकी ओर खिंच रही हैं। अभी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत बहुत सारे मामलों में देश के लिए रचनपात्मक कार्यों में जुड़ेै हैं। उनका उद्येश्य देश की संास्कृतिक विरासत को आम नागरिक के बीच ले जाना है।
यह कार्य आरएसएस भलीभंति कर रहा है। इसके अलावा आज जो पार्टी- भारतीय जनता पार्टी देश के प्रशासन को चलाने में जिम्मेदार है, उन्हीं से निकले हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। मोदीजी के प्रशासनिक कौशलता के कारण ही भारतीय जनता पार्टी आज नेहरूजी के बाद लंबे समय तक प्रधानमंत्री हैं। एक समय ऐसा भी था, जब लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के दो सदस्य थे। लेकिन धैर्य से जनता को अपनी बात समझाने और कार्यशैली से भारतीय जनमा पार्टी का शासन तीन आम चुनाओं की जीत का प्रतीक है।
इसलिए अपने कार्यों से ही पार्टी जनता में अपनी पैठ बनाती है। बैचारिक भिन्नता होनी ही चाहिए, तभी संरचात्मक कार्य होते हैं। वाद-विवाद से ही संरचना का जन्म होता है। यानी देश की प्रगति के लिए हर विचार स्वागत योग्य होना चाहिए। विचार भिन्नता के कारण जानी दुश्मन नहीं होना चाहिए। इसी प्रसंग में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का कथन याद आता है कि विचार भिन्नता हो न कि मन भिन्नता। देश के लिए सहयोग और सद्भावना ही विश्व गुरु बना सकता है। सबका विकास तभी संभ है।






