Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर खीरी से चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जीवन रक्षक माने जाने वाले डॉक्टर पर ही भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। जिला अस्पताल के एक सर्जन और उनके सहयोगियों पर न सिर्फ मरीज के परिजनों से मोटी रकम वसूलने, बल्कि एक महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला अब तूल पकड़ चुका है। जिसके चलते उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ न्याय की मांग को लेकर खुलकर मैदान में उतर आया है।
मरीज के दर्द पर ‘पैसे’ की मार
पूरा मामला जिला अस्पताल लखीमपुर से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि सौम्या शर्मा नामक महिला मरीज के ऑपरेशन के नाम पर सर्जन ने उसके परिजनों से 12,500 रुपये की अवैध मांग की। बार काउंसिल ऑफ यूपी के सदस्य व पूर्व चेयरमैन अजय कुमार शुक्ल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, गरीबी और मजबूरी के बावजूद परिजनों ने किसी तरह यह रकम जुटाई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि भुगतान के बदले उन्हें केवल 400 रुपये की रसीद दी गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और सरकारी नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
Lakhimpur Kheri: दूसरे ऑपरेशन के नाम पर फिर वसूली
आरोप यहीं खत्म नहीं होते। पहले ऑपरेशन के बाद जब दूसरे ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ी, तो सर्जन और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर 15,000 रुपये की और मांग शुरू कर दी। जब परिजनों ने आर्थिक असमर्थता जताई, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया साथ ही जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज करने की धमकी दी गई। इस कथित व्यवहार से मरीज और उसके परिजन इस कदर टूट गए कि पीड़ित महिला के आत्मघाती कदम उठाने की स्थिति बन गई।

इस मामले को लेकर अजय कुमार शुक्ल ने मीडिया से बात करते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुँचा और दबाव बढ़ा, तब अचानक अस्पताल प्रशासन ने वही ऑपरेशन सरकारी फंड से कराने की बात कही। अगर ऑपरेशन सरकारी योजना के तहत संभव था, तो पहले 12,500 रुपये क्यों लिए गए? यह साफ तौर पर अवैध वसूली और सरकारी धन के गबन का मामला है।
अधिवक्ताओं का आक्रोश से प्रशासन में हलचल
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन खीरी को सौंपा है। अधिवक्ताओं की मांग है कि आरोपी सर्जन और उनके सहयोगियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, उनके खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई हो और सेवा से बर्खास्त किया जाए। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क पर जल्द कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और दोषी डॉक्टरों को बचाने के लिए रसूख का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Report By: संजय कुमार राठौर






