Sheetala Saptami Panchang: सनातन धर्म में पंचांग का बहुत विशेष महत्व है। यह न केवल दिन के समय और तिथियों की जानकारी देता है, बल्कि नए और शुभ कार्य करने के लिए भी मार्गदर्शन करता है। 10 मार्च को मंगलवार है और चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इसे शीतला सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।
शीतला सप्तमी का महत्व
यह पर्व मुख्य रूप से देवी शीतला को समर्पित है। देवी शीतला को खसरा, चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से सुरक्षा देने वाली देवी माना जाता है। गुजरात और भारत के कई हिस्सों में इसे श्रद्धा के साथ ‘शीतला सातम’ या ‘शीतला सप्तमी’ के नाम से मनाया जाता है।
इस दिन लोग देवी का आशीर्वाद लेकर अपने परिवार की स्वास्थ्य रक्षा की कामना करते हैं। सबसे खास परंपरा यह है कि इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। पूरा दिन लोग ठंडा (शीतल) और एक दिन पहले का बना हुआ बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं।
उत्तर भारत में इसे बासोड़ा और शीतला अष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है। इन पर्वों में भी बासी भोजन का महत्व होता है और देवी से रोगमुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

Sheetala Saptami Panchang: सूर्योदय और सूर्यास्त
10 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:37 बजे और सूर्यास्त शाम 6:26 बजे होगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
- कृष्ण पक्ष की सप्तमी
- नक्षत्र: अनुराधा (शाम 7:05 तक), फिर ज्येष्ठा
- योग: हर्षण (सुबह 8:21 तक)
- करण: विष्टि (दोपहर 12:40 तक)
Sheetala Saptami Panchang: शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 से 5:48
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:08 से 12:55
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:17
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:24 से 6:48
अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 3:29 से 4:58
- यमगंड: सुबह 9:34 से 11:03
- गुलिक काल: दोपहर 12:32 से 2:00
शीतला सप्तमी का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा की कामना करने का भी एक विशेष अवसर है। इस दिन देवी शीतला की पूजा और बासी भोजन ग्रहण करने की परंपरा से रोगों से मुक्ति और घर में स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
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