Parliament News: लोकसभा सचिवालय की ओर से एक आरटीआई के जवाब में बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक जानकारी सामने आई है। वर्तमान 18वीं लोकसभा के दो माननीय सांसदों ने जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए अपना सरकारी वेतन लेने से इनकार कर दिया है। इन सांसदों में कुरुक्षेत्र से बीजेपी सांसद नवीन जिंदल और मणिपुर से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम का नाम शामिल है।
Parliament News: वेतन ही नहीं सारी सरकारी सुविधाएं भी छोड़ीं
कुरुक्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और देश के जाने-माने उद्योगपति नवीन जिंदल ने इस मामले में एक कदम और आगे बढ़कर मिसाल कायम की है। उन्होंने न केवल अपना मासिक वेतन लेने से मना किया है, बल्कि सांसद के तौर पर मिलने वाले सभी सरकारी भत्ते और अन्य सुख-सुविधाओं को भी त्याग दिया है। गौरतलब है कि नवीन जिंदल मौजूदा लोकसभा के सबसे धनवान सदस्यों में से एक हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति लगभग 1,241 करोड़ रुपये है। उनके इस फैसले को राजनीति में शुचिता और निस्वार्थ सेवा के तौर पर देखा जा रहा है।
Parliament News: प्रोफेसर बिमोल अकोइजाम ने भी दिखाई सादगी
मणिपुर की इनर मणिपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर आए प्रोफेसर बिमोल अकोइजाम ने भी सांसद के रूप में मिलने वाली सैलरी न लेने का फैसला किया है। खास बात यह है कि जहां नवीन जिंदल अरबपति सांसदों की श्रेणी में आते हैं, वहीं बिमोल अकोइजाम की घोषित संपत्ति करीब 97 लाख रुपये है। इसके बावजूद, उन्होंने जनहित को ध्यान में रखते हुए वेतन न लेने का साहसी निर्णय लिया है।
वर्तमान लोकसभा का सैलरी कार्ड
सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में लोकसभा की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
कुल सीटें: 543 (वर्तमान में 2 सीटें रिक्त हैं)।
वेतन पाने वाले सांसद: फिलहाल 481 सांसद नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
अन्य की स्थिति: आरटीआई में उन सांसदों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है जो वेतन लेने वालों की सूची में शामिल नहीं हैं, लेकिन जिंदल और अकोइजाम के नाम प्रमुखता से उभरे हैं।
ये हैं सदन के सबसे अमीर चेहरे
वेतन त्यागने वाले सांसदों के बीच सदन के सबसे धनी सांसदों की चर्चा भी जोरों पर है। आंकड़ों के अनुसार चंद्र शेखर पेम्मासानी (गुंटूर) लगभग 5,705 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे ऊपर। वही कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी (चेवेल्ला) के पास करीब 4,568 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति है ।
राजनीति में जहां अक्सर सुविधाओं की होड़ लगी रहती है, वहीं इन सांसदों का यह कदम समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश पेश करता है।
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