Assam Election Result: असम में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आज का दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम है। आज यह साफ हो जाएगा कि जनता ने अगले पांच साल तक शासन की जिम्मेदारी किस पार्टी या गठबंधन को दी है। इस बार राज्य की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान कराया गया था।
असम के लोगों ने चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बार 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ, जो पिछले चुनाव से अधिक है। साल 2021 में करीब 82 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी। इतने बड़े स्तर पर मतदान होने से सभी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है और अब सबकी नजरें नतीजों पर टिकी हैं।
64 सीटों का लक्ष्य: सरकार बनाने की असली कुंजी
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 64 सीटें जीतना जरूरी है। इसे ही बहुमत का आंकड़ा कहा जाता है।
जिस भी दल या गठबंधन के पास 64 या उससे अधिक विधायक होंगे, वह राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है। लेकिन अगर किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो ऐसी स्थिति को त्रिशंकु विधानसभा कहा जाता है। तब सरकार बनाने के लिए चुनाव के बाद गठबंधन करना जरूरी हो जाता है।
गठबंधन राजनीति और क्षेत्रीय दलों की अहम भूमिका
असम की राजनीति में पिछले कुछ समय से गठबंधन का प्रभाव ज्यादा देखने को मिला है। यहां आमतौर पर मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच होता है।
राज्य में क्षेत्रीय दल भी काफी मजबूत हैं। असम गण परिषद (AGP) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) जैसे दल कई बार चुनाव के बाद सरकार बनाने में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाते हैं।इसके अलावा, निर्दलीय उम्मीदवार और छोटे दल भी 64 सीटों के आंकड़े तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
असम का सामाजिक और भौगोलिक ढांचा काफी विविध है। ऊपरी असम, निचला असम और बराक घाटी—तीनों क्षेत्रों के मुद्दे अलग-अलग होते हैं। इसलिए किसी भी पार्टी को जीत के लिए हर क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनानी पड़ती है।
Assam Election Result: परिसीमन के बाद बदले समीकरण
हाल ही में असम में परिसीमन यानी निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है। हालांकि कुल सीटों की संख्या 126 ही रखी गई है, लेकिन कई सीटों की सीमाओं और आरक्षित श्रेणियों (SC/ST) में बदलाव हुआ है।
इन बदलावों के कारण चुनावी गणित और भी जटिल हो गया है। अब राजनीतिक दलों को नए सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को बेहतर तरीके से समझकर रणनीति बनानी पड़ रही है।
कैसे बनती है सरकार?
जब चुनाव के नतीजे आते हैं, तो जिस पार्टी या गठबंधन के पास कम से कम 64 सीटें होती हैं, उसके विधायक अपने नेता को चुनते हैं। यही नेता मुख्यमंत्री बनता है।
इसके बाद राज्यपाल उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। अगर किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राज्यपाल सबसे बड़े दल या पहले से बने गठबंधन को अपनी ताकत साबित करने का मौका देते हैं।
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