Home » उत्तर प्रदेश » FIR में ऐसा क्या लिखना भूल गई यूपी पुलिस जो हाईकोर्ट ने लगा दी फटकार? जानें क्या है मामला…

FIR में ऐसा क्या लिखना भूल गई यूपी पुलिस जो हाईकोर्ट ने लगा दी फटकार? जानें क्या है मामला…

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर और सरकारी दस्तावेजों में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्दों के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, लोकसभा और राज्यसभा के स्पीकर एवं चेयरमैन जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों को संबोधित करते समय “माननीय” या अन्य सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

संवैधानिक पदाधिकारियों को दे उचित सम्मान

डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना ने 30 अप्रैल को सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से जुड़े संवैधानिक पदाधिकारियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य सिविल सेवकों, चाहे वे कितने भी वरिष्ठ पद पर क्यों न हों, के लिए ऐसे सम्मानसूचक संबोधन जरूरी नहीं हैं।

UP News: अनुराग ठाकुर से जुड़े मामले में आई टिप्पणी

यह मामला मथुरा में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का नाम बिना किसी सम्मानसूचक शब्द के दर्ज किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। गृह विभाग की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि शिकायत हिंदी में टाइप कराई गई थी और उसी आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। शिकायतकर्ता को सरकारी प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी। कोर्ट के निर्देश के बाद मथुरा पुलिस को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

80 लाख रुपये की कथित ठगी से जुड़ा मामला

पूरा विवाद नौकरी दिलाने के नाम पर कथित 80 लाख रुपये की ठगी के मामले में सामने आया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने अनुराग ठाकुर से करीबी संबंध होने का दावा कर उससे बड़ी रकम वसूली थी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 11 मई को निर्धारित की गई है।

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